*धान खरीदी की तैयारियों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं - भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने आगामी 15 नवंबर से शुरू हो रही धान खरीदी को लेकर दोटूक शब्दों में प्रशासनिक अधिकारियों और नोडल अफसरों को चेतावनी दी है कि किसानों की गाढ़े पसीने की फसल की खरीदी व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।यदि किसी भी उपार्जन केंद्र पर अन्नदाताओं को परेशान किया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग किया जाएगा।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि धान खरीदी की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित होनी चाहिए। इस बार धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू होकर 31 जनवरी 2027 तक चलेगी। इस ढाई महीने की अवधि में जिले के सभी उपार्जन केंद्रों पर सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।जिले के सभी केंद्रों पर व्यवस्थाएं चाक-चौबंद होनी चाहिए।खरीदी शुरू होने से पहले सभी तौल कांटों और मशीनों का शत-प्रतिशत सत्यापन (कैलिब्रेशन) किया जाए ताकि तौल में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या 'कट्टी' काटने की शिकायत न आए।धान की नमी नापने वाले यंत्र हर केंद्र पर चालू हालत में उपलब्ध होने चाहिए।जिन केंद्रों पर ये यंत्र खराब हैं,उन्हें तत्काल बदला या सुधारा जाए।नमी के नाम पर किसानों को बेवजह लौटाने की नीति बर्दाश्त नहीं होगी।धान खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और बिचौलियों व अवैध धान की आवक को रोकने के लिए सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से चालू हालत में होने चाहिए।जिला और विकासखंड स्तर पर इसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए।नवंबर-दिसंबर की ठंड और मौसम के बदलाव को देखते हुए सभी उपार्जन केंद्रों पर शुद्ध पेयजल, बिजली,छांव और बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।सरकार की मंशा साफ है कि समर्थन मूल्य पर किसानों के धान का एक-एक दाना पूरी ईमानदारी से खरीदा जाए।यदि कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों में लापरवाही बरतता है या किसानों के साथ दुर्व्यवहार करता है,तो ऐसे भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि 15 नवंबर से पहले सभी उपार्जन केंद्रों का भौतिक सत्यापन कर लिया जाए और तैयारियों की अंतिम समीक्षा रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि अन्नदाता बिना किसी डर और असुविधा के अपनी फसल बेच सकें।