*त्योहारों के मुहाने पर अंधेरे में डूबा दुर्ग,डॉ. प्रतीक उमरे ने साधा नगर निगम प्रशासन पर निशाना*

*त्योहारों के मुहाने पर अंधेरे में डूबा दुर्ग,डॉ. प्रतीक उमरे ने साधा नगर निगम प्रशासन पर निशाना*

*त्योहारों के मुहाने पर अंधेरे में डूबा दुर्ग,डॉ. प्रतीक उमरे ने साधा नगर निगम प्रशासन पर निशाना*
*त्योहारों के मुहाने पर अंधेरे में डूबा दुर्ग,डॉ. प्रतीक उमरे ने साधा नगर निगम प्रशासन पर निशाना*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि दुर्ग नगर निगम प्रशासन की घोर प्रशासनिक विफलता और अदूरदर्शिता के कारण दुर्ग शहर त्योहारों के मुहाने पर अंधेरे के आगोश में समाया हुआ है।दुर्ग के प्रमुख व्यापारिक मार्गों से लेकर अंदरूनी वार्डों और गली-मोहल्लों में स्ट्रीट लाइट पोल शोपीस बनकर रह गए हैं।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि सड़कों पर छाए इस अंधेरे के कारण महिलाओं,बुजुर्गों और बच्चों की सुरक्षा दांव पर लगी हुई है।त्योहारी सीजन होने के कारण बाजारों में भारी भीड़ उमड़ रही है,लेकिन प्रकाश व्यवस्था ठप होने से राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।राह चलते लोगों को गड्ढे न दिखने के कारण दुर्घटनाओं का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि अगस्त 2026 में पुरानी मेंटेनेंस एजेंसी का अनुबंध समाप्त हो चुका था।निगम प्रशासन को इसकी पूर्व जानकारी थी,फिर भी समय रहते नई एजेंसी तय क्यों नहीं की गई? पिछले दो महीनों से पूरी फाइल को दबाकर रखा गया।एकल निविदा आने का बहाना बनाकर प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया,जिससे स्पष्ट होता है कि अधिकारियों और ठेकेदारों के बीच कोई अंदरूनी साठगांठ चल रही है।अब नई एजेंसी के आने में डेढ़ से दो महीने का समय और लगेगा यानी निगम प्रशासन चाहता है कि दुर्ग की जनता पूरी दिवाली का त्योहार अंधेरे में ही मनाए।डॉ. प्रतीक उमरे ने निगम के वित्तीय कुप्रबंधन पर कहा कि यह बेहद शर्मनाक और हास्यास्पद स्थिति है कि करोड़ों रुपये का बजट रखने वाले और जनता से पानी,बिजली और संपत्ति कर के रूप में मोटी रकम वसूलने वाले दुर्ग नगर निगम का खजाना पूरी तरह खाली हो चुका है।दुर्ग नगर निगम के पास खराब बल्बों को कसने के लिए जरूरी क्लैंप तक खरीदने का बजट नहीं है।स्थिति इतनी बदतर हो गई है कि निगम प्रशासन अब पार्षदों के सामने हाथ फैला रहा है कि वे अपनी पार्षद निधि से स्ट्रीट लाइट सुधरवाएं तो फिर जनता से लिया गया टैक्स का पैसा आखिर किस भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया?

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