सादर प्रकाशनार्थ
प्रेस विज्ञप्ति
*"ब्रह्मकुमारीज की भव्य एवं अलौकिक चैतन्य देवियों की झांकी' महामाया मंदिर परिसर में*
16 अक्टूबर 2026 रतनपुर।
शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, बिलासपुर मुख्य सेवाकेंद्र की मुख्य संचालिका आदरणीय ब्रह्माकुमारी स्वाति दीदी के कुशल मार्गदर्शन में, रतनपुर शाखा द्वारा ऐतिहासिक एवं पवित्र महामाया मंदिर परिसर में एक भव्य एवं अलौकिक 'चैतन्य देवियों की झांकी' का शुभारंभ किया गया है। तीन दिवसीय कार्यक्रम के प्रथम दिन ही श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
नवरात्रि के पावन माहौल में रतनपुर महामाया दर्शन के लिए आने वाले हजारों श्रद्धालु ब्रह्माकुमारीज द्वारा सजाई गई इस अलौकिक चैतन्य झांकी की ओर स्वतः ही खिंचे चले आ रहे हैं। झांकी के प्रथम दिन ही परिसर में श्रद्धालुओं का तांता लग गया। पूरी तरह से एकाग्र, शांत और देवी स्वरूप में विराजमान ब्रह्माकुमारी बहनों को देखकर हर कोई स्तब्ध और भावविभोर है। यह चैतन्य झांकी महामाया परिसर में नवरात्रि की षष्ठी और सप्तमी तिथि तक श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ सजी रहेगी, जहाँ प्रतिदिन हजारों भक्तों के पहुंचने की संभावना है। इस आध्यात्मिक आयोजन के अवसर पर रतनपुर सेवा केंद्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी संतोषी दीदी ने उपस्थित विशाल जनसमुदाय और भक्तजनों को संबोधित करते हुए 'चैतन्य देवियों' का वास्तविक और आध्यात्मिक रहस्य समझाया। उन्होंने कहा कि झांकी में देवी रूप में विराजमान ब्रह्माकुमारी बहनों का परिचय देते हुए बताया, "ये देविया कोई जड़ मूर्तियाँ नहीं हैं, बल्कि ये ब्रह्माकुमारी बहनें हैं, जिन्होंने नियमित रूप से 'राजयोग ध्यान' के अभ्यास द्वारा अपने मन, बुद्धि और संस्कारों को पूरी तरह से पवित्र और एकाग्र बनाया है। घंटों तक बिना किसी हलचल के, पूर्ण आंतरिक शांति और दिव्य चेतना में स्थित रहना केवल राजयोग की शक्ति से ही संभव है। जब अपने मन बुद्धि को परमात्मा की याद में स्थित करते है, तो उसके अंदर दैवीय गुणों का प्राकट्य होता है, और यही स्थिति उसे 'चैतन्य देवी' बनाती है।"
दीदी के वक्तव्य को रेखांकित करते हुए बताया गया कि देवियों के अनेक हाथ और उनके अस्त्र-शस्त्र वास्तव में किसी हिंसा के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे आत्मा की आंतरिक शक्तियों और अष्ट शक्तियों के सूचक हैं। देवियों द्वारा महिषासुर जैसे राक्षसों का वध करना, हमारे अंदर छिपे काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसे विकारों को समाप्त करने का आध्यात्मिक संदेश देता है। जब मनुष्य राजयोग के द्वारा अपने इन आंतरिक विकारों पर विजय प्राप्त कर लेता है, तभी वह सच्चे अर्थों में देवत्व की ओर अग्रसर होता है।
झांकी के साथ-साथ परिसर में लगाई गई आध्यात्मिक चित्र प्रदर्शनी भी भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस प्रदर्शनी के माध्यम से बेहद सरल और प्रभावी चित्रों द्वारा मनुष्य जीवन के वास्तविक उद्देश्य, आत्मा और परमात्मा का सत्य परिचय, सृष्टि चक्र का रहस्य तथा कर्मों की गहन गति को समझाया जा रहा है। ब्रह्माकुमारी संस्थान के सेवाधारी भाई-बहनें यहाँ आने वाले दर्शनार्थियों को चित्रों के माध्यम से निःशुल्क ईश्वरीय ज्ञान दे रहे हैं, जिससे प्रभावित होकर लोग अपने जीवन को व्यसनमुक्त और तनावमुक्त बनाने का संकल्प ले रहे हैं। यह चैतन्य झांकी हर मनुष्य को याद दिलाती है कि हम सभी के भीतर एक देवत्व छिपा है, जिसे केवल ईश्वरीय ज्ञान और ध्यान के माध्यम से जागृत किया जा सकता है।ब्रह्माकुमारी संतोषी दीदी ने बिलासपुर और आसपास के सभी धर्मप्रेमी भाई-बहनों तथा श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे षष्ठी और सप्तमी तक चलने वाली इस अलौकिक चैतन्य देवियों की झांकी का दर्शन कर आध्यात्मिक चित्र प्रदर्शनी का लाभ उठाएं और अपने जीवन को सुख, शांति और समृद्धि से भरपूर बनाने के लिए राजयोग कोर्स अवश्य करे। महामाया पारा, पोस्ट ऑफिस गली में स्थित ब्रह्मकुमारीज रतनपुर सेवा केंद्र में निशुल्क पांच दिवसीय राजयोग शिविर का आयोजन 20 अक्टूबर 2026 से किया जा रहा है। सुबह 8:00 बजे से 9:00 बजे तक एवं शाम शाम 6 से 7:00 बजे तक।
ईश्वरीय सेवा में
ब्रह्माकुमारी संतोषी
रतनपुर।