*दुर्ग की जनता को 'अनुच्छेद 21' के तहत स्वस्थ जीवन का अधिकार, मिलावटखोरों पर लगे रासुका: भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*

*दुर्ग की जनता को 'अनुच्छेद 21' के तहत स्वस्थ जीवन का अधिकार, मिलावटखोरों पर लगे रासुका: भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*

*दुर्ग की जनता को 'अनुच्छेद 21' के तहत स्वस्थ जीवन का अधिकार, मिलावटखोरों पर लगे रासुका: भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*
*दुर्ग की जनता को 'अनुच्छेद 21' के तहत स्वस्थ जीवन का अधिकार, मिलावटखोरों पर लगे रासुका: भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने त्यौहारी सीजन में बाजारों में सक्रिय मिलावटखोरों और उन्हें संरक्षण देने वाले प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ तीखा हमला बोला है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि दुर्ग जिले की आम जनता की थाली में सरेआम धीमा जहर परोसा जा रहा है और पूरा प्रशासनिक अमला आंखें मूंदकर मूकदर्शक बना बैठा है।डॉ. प्रतीक उमरे ने सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों पर आखिर प्रशासन इतना मेहरबान क्यों है?त्यौहारी सीजन में बाजारों में सिर्फ और सिर्फ अधिकारियों की वसूली का खेल चल रहा है।विभाग के अधिकारी साल भर सोते रहते हैं और त्योहार के एक-दो दिन पहले जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए छोटी-मोटी दुकानों पर दिखावे की कार्रवाई कर खानापूर्ति करते हैं, जबकि यह साफ हो चुका है कि बाहरी राज्यों से भारी मात्रा में सिंथेटिक नकली मावा,केमिकल युक्त रंगीन मिठाइयां और घटिया स्तर का पॉम ऑयल व रिफाइंड तेल दुर्ग के बाजारों में खपाया जा रहा है,जो सीधे तौर पर मासूम बच्चों और बुजुर्गों के लिवर,किडनी और दिल से खिलवाड़ है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि दुर्ग जिले के बाजारों में चल रहा यह मिलावटखोरी का सिंडिकेट सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम,2006 की धज्जियां उड़ा रहा है। इस अधिनियम की धारा 59 के तहत स्पष्ट प्रावधान है कि यदि कोई मिलावटी या असुरक्षित खाद्य पदार्थ किसी नागरिक के स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचाता है या उसकी मृत्यु का कारण बन सकता है,तो दोषी को आजीवन कारावास और ₹10 लाख तक के जुर्माने का कानूनन दंड दिया जाना चाहिए।इसके बावजूद स्थानीय अधिकारी केवल धारा 51 व 52 के तहत 'अमानक' या 'मिसब्रांडेड' भोजन का मामूली जुर्माना लगाकर बड़े मगरमच्छों को पिछले दरवाजे से बचा लेते हैं।यह सीधे तौर पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 274 और 275 के तहत एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है।प्रशासन की इस ढिलाई के कारण ही मिलावटखोर बेखौफ होकर नागरिकों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 द्वारा दिए गए 'सशक्त और स्वस्थ जीवन जीने के अधिकार' से वंचित कर रहे हैं।लिए गए सैंपल की रिपोर्ट त्योहार बीत जाने के महीनों बाद आती है,तब तक जनता वह जहरीला सामान खा चुकी होती है इसलिए डॉ. प्रतीक उमरे ने कलेक्टर अभिजित सिंह से मांग किया है कि मोबाइल लैब के जरिए ऑन-स्पॉट जांच हो और रिपोर्ट 24 घंटे में सार्वजनिक की जाए।

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