प्रेस विज्ञप्ति
*कलम की माला से गुरु वंदना: बिलासपुर राजयोग भवन में बीके स्वाति दीदी का भव्य सम्मान*
*• ब्रह्माकुमारीज़ के राजयोग भवन में हर्षोल्लास से मनाया गया शिक्षक दिवस*
*• मुख्य संचालिका बीके स्वाति दीदी का 108 पेन की भव्य माला से हुआ अनूठा सम्मान*
*• जीवन को गढ़ने वाले 6 प्रकार के शिक्षकों पर डाला गया प्रकाश*
बिलासपुर, 5 सितंबर 2026:
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की बिलासपुर मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में शिक्षक दिवस का पावन पर्व बेहद गरिमामय और आध्यात्मिक हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस विशेष समारोह में शहर के गणमान्य नागरिकों, राजयोगियों और साधकों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मानव जीवन में शिक्षकों के महत्व और स्वयं के भीतर छिपे आध्यात्मिक शिक्षक को जाग्रत करना था।
*जीवन के 6 मार्गदर्शक: ब्रह्माकुमारी स्वाति दीदी*
समारोह को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए सेवाकेंद्र की मुख्य संचालिका ब्रह्माकुमारी स्वाति दीदी ने जीवन को आकार देने वाले शिक्षकों की अनूठी व्याख्या की। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने जीवन काल में लगातार सीखता है और उसे सही रास्ता दिखाने वाले मुख्य रूप से 6 प्रकार के शिक्षक होते हैं:
*1. माता-पिता (प्रथम गुरु):* बालक जब जन्म लेता है, तो उसकी माँ उसकी पहली शिक्षिका होती है। माता-पिता बच्चे को न केवल बोलना और चलना सिखाते हैं, बल्कि उसमें मानवीय मूल्यों और संस्कारों का बीजारोपण भी करते हैं।
*2. लौकिक शिक्षक (विद्यालयीन गुरु):* स्कूल और कॉलेज के शिक्षक हमें साक्षर बनाते हैं। वे हमें सांसारिक ज्ञान, विज्ञान, कला और समाज में जीने की कला सिखाते हैं, जिससे हम एक जिम्मेदार नागरिक बनते हैं।
*3. परिस्थितियाँ (अनुभव का शिक्षक):* जीवन में आने वाली हर अनुकूल और प्रतिकूल परिस्थिति हमारी बहुत बड़ी शिक्षक होती है। सुख हमें विनम्रता सिखाता है, तो दुख और कठिनाइयाँ हमें धैर्य, साहस और आत्मबल का पाठ पढ़ाती हैं।
*4. मित्र और संबंधी (सामाजिक गुरु):* हमारे आस-पास के लोग, मित्र और रिश्तेदार भी हमारे शिक्षक हैं। उनके व्यवहार से हम सीखते हैं कि समाज में किसके साथ कैसा तालमेल बिठाना है। वे हमारे अच्छे-बुरे कर्मों का दर्पण बनते हैं।
*5. अंतर्विवेक (आंतरिक शिक्षक):* मनुष्य की अपनी अंतरात्मा या विवेक उसका आंतरिक शिक्षक है। जब भी हम कोई गलत कदम उठाने लगते हैं, तो अंतरात्मा की आवाज हमें सचेत करती है। इस आवाज को सुनना और मानना ही सच्ची बुद्धिमानी है।
*6. परमपिता परमात्मा शिवबाबा (सर्वोच्च शिक्षक):* इन सबमें सबसे महत्वपूर्ण, सर्वोच्च और त्रिकालदर्शी शिक्षक स्वयं परमपिता परमात्मा शिवबाबा हैं। जब आत्मा कलियुग के अंधकार में भटक जाती है, तब स्वयं परमात्मा आकर हमें राजयोग के माध्यम से सत्य ज्ञान की शिक्षा देते हैं। वे हमें विकारों से मुक्त कर जीवन को कमल पुष्प समान पवित्र बनाना सिखाते हैं। परमात्मा का दिया ज्ञान ही आत्मा को सद्गति की ओर ले जाता है।
*108 पेन की भव्य माला से अभिनव सम्मान*
शिक्षक दिवस के इस पावन अवसर पर संस्थान के भाई-बहनों ने अपनी प्रिय शिक्षिका और मार्गदर्शिका ब्रह्माकुमारी स्वाति दीदी के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए एक बेहद अनूठा और भव्य प्रयास किया। ज्ञान के प्रतीक के रूप में, भाई-बहनों ने दीदी को 108 पेन से तैयार की गई एक भव्य और सुंदर माला पहनाई। इस अभिनव सम्मान को देखकर पूरा सभागार करतल ध्वनि से गुंजायमान हो उठा। दीदी ने इस प्रेममयी भेंट को स्वीकार करते हुए सभी भाई-बहनों को ज्ञान-मार्ग पर अडिग रहने और श्रेष्ठ कर्म करने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के दौरान सेवाकेंद्र की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका *बीके संतोषी दीदी* ने भी अपने उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि एक सच्चा शिक्षक वही है जो केवल शब्दों से नहीं, बल्कि अपने चरित्र और दिव्य आचरण से दूसरों को प्रेरित करे। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान आज पूरे विश्व में ईश्वरीय ज्ञान के माध्यम से समाज को नैतिक और आध्यात्मिक रूप से सुदृढ़ करने का कार्य कर रहा है।
इसी क्रम में, नगर की प्रबुद्ध नागरिक और संस्थान से जुड़ी *अंजू दुआ बहन* ने भावुक होते हुए कहा कि राजयोग भवन में आकर जो आत्मिक शांति और जीवन जीने की नई दिशा मिलती है, वह अद्भुत है। उन्होंने ब्रह्माकुमारी स्वाति दीदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके स्नेहपूर्ण मार्गदर्शन ने अनगिनत परिवारों के जीवन में सुख-शांति का संचार किया है।
अंत में सभी ने इस पावन पर्व पर परमात्मा के दिखाए मार्ग पर चलने और जीवन में दिव्य गुणों को अपनाने का दृढ़ संकल्प लिया।
ईश्वरीय सेवा में,
बीके स्वाति
राजयोग भवन, बिलासपुर