*शिवनाथ में सीवेज कौन बहा रहा है? NGT से स्वतंत्र जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने दुर्ग शहर की जीवनदायिनी शिवनाथ नदी में पुलगांव एवं शंकर नाला के माध्यम से पहुंच रहे सीवेज,गंदे पानी और ठोस कचरे की गंभीर समस्या को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।उन्होंने एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव से दोनों नालों तथा शिवनाथ नदी की वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र जांच और वैज्ञानिक परीक्षण कराने तथा 16 जनवरी 2026 को जारी निर्देशों के वास्तविक अनुपालन का जमीनी सत्यापन कराने की मांग की है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि शिवनाथ नदी केवल एक नदी नहीं,बल्कि दुर्ग-भिलाई क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत है।ऐसे में लगातार नालों के माध्यम से प्रदूषित पानी का नदी में पहुंचना गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि वर्षों से इस समस्या के समाधान के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन यदि आज भी अनट्रेटेड सीवेज नदी तक पहुंच रहा है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि अब तक की कार्रवाई का वास्तविक परिणाम क्या रहा।
*2024 में कलेक्टर ने भी दिए थे निर्देश*
डॉ. प्रतीक उमरे ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि कार्यालय कलेक्टर, जिला-दुर्ग द्वारा 03 सितंबर 2024 को नगर पालिक निगम दुर्ग के आयुक्त को शिवनाथ नदी को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने एवं प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। इसमें पुलगांव एवं शंकर नाला से शिवनाथ नदी में पहुंचने वाले गंदे पानी को प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल किया गया था।उन्होंने कहा कि प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद यदि समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है तो अब केवल रिपोर्ट और कागजी कार्रवाई के बजाय स्वतंत्र जमीनी जांच जरूरी है।
*2025 के निरीक्षण में सामने आया था भारी सीवेज प्रवाह*
ज्ञापन में उपलब्ध निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए डॉ.प्रतीक उमरे ने बताया कि 29 अगस्त 2025 के संयुक्त निरीक्षण में पुलगांव नाले का प्रवाह लगभग 22.47 एमएलडी तथा शंकर नाले का प्रवाह लगभग 25.5 एमएलडी दर्ज किया गया था। दोनों नालों के पानी में बीओडी सहित प्रदूषण संबंधी मानकों की स्थिति भी चिंता का विषय बताई गई थी।उन्होंने कहा कि जब इतनी बड़ी मात्रा में प्रदूषित पानी नालों के माध्यम से बह रहा हो तो यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि वह बिना उपचार के शिवनाथ नदी तक न पहुंचे।
*16 जनवरी 2026 के एनजीटी निर्देशों के बाद भी स्थिति का हो स्वतंत्र सत्यापन*
डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि मामले में एनजीटी द्वारा 16 जनवरी 2026 को दोनों नालों पर प्रस्तावित एसटीपी का निर्माण शीघ्र पूरा करने तथा एसटीपी के पूरी तरह चालू होने तक अनट्रेटेड वेस्टवाटर को नदी अथवा जलस्रोत में जाने से रोकने के लिए वैकल्पिक उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने संबंधी निर्देश दिए गए थे।उन्होंने सवाल उठाया कि आदेश के बाद जमीन पर कितना काम हुआ? दोनों एसटीपी की वर्तमान स्थिति क्या है? और जब तक एसटीपी पूरी तरह चालू नहीं हुए हैं,तब तक अनट्रेटेड सीवेज को नदी में जाने से रोकने की वास्तविक व्यवस्था क्या है?इन्हीं सवालों का जवाब जानने के लिए उन्होंने एनजीटी से वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि एनजीटी के आदेशों की अनुपालन रिपोर्ट केवल कागजों में पूरी होना पर्याप्त नहीं है। यदि नदी में आज भी प्रदूषित पानी पहुंच रहा है तो वास्तविक स्थिति का वैज्ञानिक सत्यापन आवश्यक है।उन्होंने जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव से मांग की कि पुलगांव नाला,शंकर नाला और दोनों नालों के शिवनाथ नदी से मिलने वाले स्थानों का तत्काल स्वतंत्र निरीक्षण कराया जाए। साथ ही नालों एवं नदी के विभिन्न बिंदुओं से ताजा पानी के नमूने लेकर बीओडी, सीओडी, डियो, टीएसएस,फीकल कॉलीफॉर्म सहित आवश्यक प्रदूषण मानकों की वैज्ञानिक जांच कराई जाए।
*67 लाख रुपये की सफाई के बाद फिर जमा हो रहा कचरा*
डॉ. प्रतीक उमरे ने पुलगांव नाले की सफाई पर खर्च किए गए लगभग 67 लाख रुपये का मुद्दा भी एनजीटी के समक्ष उठाया है। उन्होंने मांग की कि यदि सफाई कार्य पर इतनी राशि खर्च होने के बाद भी नाले में दोबारा कचरा और गंदगी जमा हो रही है तो पूर्व में किए गए कार्य की गुणवत्ता, उपयोगिता और उसके वास्तविक पर्यावरणीय परिणाम की जांच कराई जाए।उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से होने वाले सफाई कार्य का उद्देश्य केवल एक बार नाला साफ करना नहीं, बल्कि प्रदूषण के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी परिणाम देना होना चाहिए।डॉ. प्रतीक उमरे ने शिवनाथ नदी से संबंधित पेयजल व्यवस्था को देखते हुए नदी के उस क्षेत्र में विशेष वैज्ञानिक अध्ययन कराने की भी मांग की है,जहां प्रदूषित नालों के पानी का प्रभाव पड़ सकता है।उन्होंने कहा कि जलस्रोत की सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।