*पिया की लंबी उम्र की कामना में 24 घंटे निर्जला रहीं तीजहारिनें, फूलरा में सजी शिव-पार्वती की भक्ति*

*पिया की लंबी उम्र की कामना में 24 घंटे निर्जला रहीं तीजहारिनें, फूलरा में सजी शिव-पार्वती की भक्ति*

*पिया की लंबी उम्र की कामना में 24 घंटे निर्जला रहीं तीजहारिनें, फूलरा में सजी शिव-पार्वती की भक्ति*
*पिया की लंबी उम्र की कामना में 24 घंटे निर्जला रहीं तीजहारिनें, फूलरा में सजी शिव-पार्वती की भक्ति*

 छत्तीसगढ़ की माटी में रची-बसी तीज की परंपरा एक बार फिर ग्राम भरुवाडीह कला में महिलाओं की अटूट आस्था, प्रेम और समर्पण का भाव लेकर सामने आई। तीजहारिन महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना को लेकर पूरे 24 घंटे निर्जला व्रत रखा। तेज धूप हो या प्यास की बेचैनी, तीजहारिनों के संकल्प के आगे हर कठिनाई छोटी नजर आई। व्रत की पूर्व रात्रि महिलाओं ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रीति के अनुसार फूलरा सजाकर उसमें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना की तथा तीज की धार्मिक परंपराओं का
 श्रद्धापूर्वक निर्वहन किया। रातभर भक्ति और उल्लास का वातावरण बना रहा। अगले दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं भगवान शिव-पार्वती का स्मरण करने के बाद महिलाओं ने अपना निर्जला व्रत तोड़ा। ग्राम की तीजहारिन महिलाएं सुनीता, गायत्री, योगेश्वरी आदि ने बताया कि तीज केवल एक व्रत नहीं, बल्कि महिलाओं की आस्था, प्रेम और पारिवारिक संस्कारों से जुड़ी महत्वपूर्ण परंपरा है। 

वहीं ग्राम की उर्मिला वर्मा ने भावुक होकर बताया कि वह लगभग 30 वर्षों से तीज का निर्जला व्रत करती आ रही हैं। उन्होंने कहा कि व्रत के दौरान कितनी भी प्यास क्यों न लगे, लेकिन मन में भगवान शिव-पार्वती के प्रति आस्था और अपने परिवार के मंगल की भावना इतनी प्रबल रहती है कि पानी पीने का विचार भी नहीं आता। छत्तीसगढ़ में तीजहारिनों का यह तप और समर्पण इस बात की मिसाल है कि यहां की लोकपरंपराएं केवल त्योहार नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे संस्कार और भावनाओं की जीवंत धरोहर हैं। भरुवाडीह कला में तीजहारिन महिलाओं की भक्ति ने पूरे गांव को शिव-पार्वती की आराधना और छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग में रंग दिया।

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