*सकारात्मक चिंतन से बदल सकती है जीवन की दिशा - ब्रह्माकुमारी संतोषी दीदी*

*सकारात्मक चिंतन से बदल सकती है जीवन की दिशा - ब्रह्माकुमारी संतोषी दीदी*

*सकारात्मक चिंतन से बदल सकती है जीवन की दिशा - ब्रह्माकुमारी संतोषी दीदी*
प्रेस विज्ञप्ति 
*सकारात्मक चिंतन से बदल सकती है जीवन की दिशा - ब्रह्माकुमारी संतोषी दीदी*
8 सितम्बर 2026 बिलासपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, बिलासपुर की मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन द्वारा केंद्रीय जेल बिलासपुर में बंदियों के लिए “सकारात्मक चिंतन” विषय पर विशेष आध्यात्मिक क्लास का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राजयोग भवन की वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका बीके संतोषी दीदी ने बंदियों को सकारात्मक सोच की शक्ति, मन की शांति तथा जीवन में आत्म-परिवर्तन के महत्व से अवगत कराया।

बीके संतोषी दीदी ने कहा कि मनुष्य के जीवन में परिस्थितियां हमेशा उसके अनुकूल हों, यह आवश्यक नहीं है, लेकिन उन परिस्थितियों के प्रति हमारी सोच और दृष्टिकोण हमारे हाथ में होता है। नकारात्मक परिस्थितियों में भी यदि हम सकारात्मक चिंतन करना सीख लें तो मन की शक्ति बढ़ती है और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता विकसित होती है। उन्होंने कहा कि विचार ही हमारे शब्द, कर्म और संस्कारों का आधार बनते हैं। इसलिए श्रेष्ठ जीवन की शुरुआत श्रेष्ठ विचारों से होती है।

उन्होंने बंदियों को समझाया कि बीता हुआ समय वापस नहीं आ सकता, लेकिन वर्तमान समय का सही उपयोग करके भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है। जीवन में हुई गलतियों को बार-बार याद करके स्वयं को दोषी ठहराते रहना समाधान नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि व्यक्ति अपनी भूलों से सीख लेकर स्वयं में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प करे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के अंदर परिवर्तन की शक्ति विद्यमान है और दृढ़ संकल्प के साथ जीवन की दिशा बदली जा सकती है। आगे दीदी ने कहा कि कई बार मनुष्य
परिस्थितियों के कारण तनाव, क्रोध, चिंता, निराशा और भय जैसे नकारात्मक विचारों से घिर जाता है। ऐसे समय में मन को सकारात्मक विचारों का आधार देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बंदियों को अपने विचारों पर ध्यान देने और दिन की शुरुआत अच्छे संकल्पों के साथ करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि “जैसा हम सोचते हैं, वैसा ही धीरे-धीरे हमारा व्यक्तित्व बनता जाता है।”
उन्होंने कहा कि जेल में रहना जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं है, बल्कि यह समय आत्मचिंतन और आत्म-सुधार का अवसर भी बन सकता है। व्यक्ति यदि अपने जीवन की कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करे और अपने अंदर प्रेम, शांति, क्षमा, करुणा, धैर्य एवं सद्भाव जैसे गुणों को विकसित करे तो वह स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार और समाज के लिए भी बेहतर जीवन जी सकता है। इस अवसर पर उन्होंने राजयोग ध्यान के महत्व को भी समझाया। उन्होंने बताया कि राजयोग के माध्यम से व्यक्ति स्वयं को एक शांत, शक्तिशाली और सकारात्मक आत्मा के रूप में अनुभव कर सकता है। परमात्मा से मानसिक संबंध जोड़ने से मन को शांति और शक्ति मिलती है तथा नकारात्मक विचारों पर नियंत्रण रखने में सहायता मिलती है। उन्होंने बंदियों को कुछ समय अपने लिए निकालकर शांत मन से आत्मचिंतन करने तथा श्रेष्ठ संकल्पों का अभ्यास करने के लिए प्रेरित किया।
बीके संतोषी दीदी ने कहा कि परिस्थितियां व्यक्ति को नहीं, बल्कि व्यक्ति की सोच परिस्थितियों को देखने का नजरिया बदलती है। इसलिए जीवन में किसी भी प्रकार की कठिनाई आने पर निराश होने के बजाय यह विचार करना चाहिए कि इस परिस्थिति से मैं क्या सीख सकता हूं और स्वयं को कैसे बेहतर बना सकता हूं।
कार्यक्रम के दौरान बंदियों ने सकारात्मक चिंतन एवं आध्यात्मिक जीवन से संबंधित विषयों को रुचिपूर्वक सुना। उन्होंने अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने तथा नकारात्मक विचारों से दूर रहने का संकल्प लिया।

ईश्वरीय सेवा में 
ब्रह्माकुमारी स्वाति
राजयोग भवन, बिलासपुर

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