*पुलगांव नाले की सफाई पर खर्च हुई 67 लाख रुपये की राशि की हो उच्चस्तरीय जांच - भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*
*पुलगांव नाले की सफाई पर खर्च हुई 67 लाख रुपये की राशि की हो उच्चस्तरीय जांच - भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से पुलगांव नाले की सफाई एवं संबंधित कार्यों पर खर्च की गई लगभग 67 लाख रुपये की राशि के उपयोग, कार्य की गुणवत्ता,भुगतान प्रक्रिया और वास्तविक परिणामों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि मानसून से पहले पुलगांव नाले की सफाई के नाम पर दुर्ग नगर निगम प्रशासन द्वारा करीब 67 लाख रुपये खर्च किए गए।लेकिन बारिश होने के बाद नाले में फिर से कचरे और गंदगी के ढेर दिखाई दे रहे हैं। नाले का गंदा पानी महामाया एन्क्लेव के पास शिवनाथ नदी में मिल रहा है।यही स्थान शहर के वाटर फिल्टर प्लांट्स का मुख्य इंटेक भी है।परिणामस्वरूप शिवनाथ नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है और जल आपूर्ति व्यवस्था तथा जल की गुणवत्ता पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।उन्होंने कहा कि नाले की ऊपरी इलाकों से बहकर आया प्लास्टिक और अन्य कचरा जमा हो रहा है। पुलगांव रोड से महामाया एन्क्लेव तक कई जगहों पर यही स्थिति है।नाले का गंदा पानी बिना किसी प्रभावी उपचार के सीधे शिवनाथ नदी में मिल रहा है जिससे नदी के प्रदूषण और पर्यावरणीय मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।नाले के पानी को डायवर्ट करने की योजना पर भी कोई ठोस काम नहीं हुआ दिखाई दे रहा है।डॉ. प्रतीक उमरे ने स्पष्ट किया कि नगर निगम की ओर से मानसून से पहले नाले से गाद और जलकुंभी हटाने का काम कराया गया था, लेकिन बारिश के बाद नाले में दोबारा बड़ी मात्रा में कचरा जमा हो गया है।सवाल यह है की सफाई के बाद भी कचरे की रोकथाम के लिए स्थायी इंतजाम क्यों नहीं किए गए।केवल कागजों पर सफाई और जमीन पर कचरा दिखाई दे रहा है।उन्होंने कहा कि पुलगांव नाले की सबसे बड़ी समस्या जलकुंभी और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाला पानी तथा कचरा है।शहर की सीमा में सफाई कराई गई थी, लेकिन ऊपरी क्षेत्रों से बहकर आने वाले कचरे के कारण परेशानी बनी हुई है।नाले का पानी डायवर्ट कर डाउनस्ट्रीम में छोड़ने के प्रस्ताव पर भी ठोस अमल नहीं हुआ।डॉ. प्रतीक उमरे ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से अनुरोध किया है कि पुलगांव नाले की सफाई एवं संबंधित कार्यों पर खर्च हुई लगभग 67 लाख रुपये की राशि के उपयोग की जांच कराई जाए तथा कार्य की गुणवत्ता,भुगतान प्रक्रिया और वास्तविक परिणामों की गहन जांच हो एवं बिना उपचार के नाले का पानी शिवनाथ नदी में मिलने से उत्पन्न प्रदूषण की स्थिति का आकलन किया जाए।