तिल्दा नेवरा।
दिलीप वर्मा
*सरस्वती शिशु मंदिर तिल्दा में ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया गया*
सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तिल्दा (सासाहोली )में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान, नई दिल्ली के तत्त्वावधान में ‘नमामि भारतम्’ कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संकुल समन्वयक श्री शिव प्रसाद बर्मन, विद्यालय के प्राचार्य श्री नरेश साहू एवं वरिष्ठ आचार्य श्री देवीलाल पटेल उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती, ॐ एवं भारत माता के छायाचित्रों के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन तथा माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। मुख्य अतिथि का तिलक-रोली लगाकर स्वागत किया गया। इसके पश्चात ठीक प्रातः 11 बजे विद्यालय के सभी भैया-बहनों, आचार्य एवं दीदियों ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया।
इस अवसर पर प्राचार्य श्री नरेश साहू ने ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा वर्ष 1875 में ‘वंदे मातरम्’ की रचना की गई थी। इसका प्रथम प्रकाशन 7 नवंबर 1875 को ‘बंगदर्शन’ पत्रिका में हुआ तथा वर्ष 1882 में इसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में राष्ट्रीय जागरण और देशभक्ति की भावना का महत्वपूर्ण प्रतीक बना।
मुख्य अतिथि श्री शिव प्रसाद बर्मन ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत गीत है। इसमें विभिन्न भावों की अभिव्यक्ति होती है और इसने भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत के गायन के दौरान शब्दों एवं उच्चारण की शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी भैया-बहनों एवं आचार्य-दीदियों को बधाई दी।
वरिष्ठ आचार्य श्री देवीलाल पटेल ने ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह हमारी संस्कृति, मातृभूमि के प्रति सम्मान और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ आचार्य श्री टुकेश्वर प्रसाद वर्मा द्वारा किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के आचार्य-दीदियाँ एवं सभी भैया-बहन उपस्थित रहे।