*अंतिम संस्कार के लिए वसूली करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, नि:शुल्क लकड़ी व्यवस्था तत्काल बहाल करे निगम – भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*

*अंतिम संस्कार के लिए वसूली करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, नि:शुल्क लकड़ी व्यवस्था तत्काल बहाल करे निगम – भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*

*अंतिम संस्कार के लिए वसूली करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, नि:शुल्क लकड़ी व्यवस्था तत्काल बहाल करे निगम – भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*
*अंतिम संस्कार के लिए वसूली करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, नि:शुल्क लकड़ी व्यवस्था तत्काल बहाल करे निगम – भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के लिए आने वाले शोकाकुल परिवारों से लकड़ी के नाम पर राशि वसूले जाने को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए नगर निगम प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील और मानवीय आवश्यकता को किसी भी स्थिति में आर्थिक बोझ का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि शहर के शिवनाथ नदी स्थित मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचते हैं।ऐसे समय में परिवार पहले ही अपने प्रियजन को खोने के दुख से गुजर रहा होता है।यदि उन्हें अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक लकड़ी भी ऊंची दर पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़े,तो यह व्यवस्था की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।उन्होंने कहा कि नगर निगम द्वारा पूर्व में नि:शुल्क लकड़ी वितरण की व्यवस्था संचालित की जा रही थी।ठेका अवधि समाप्त होने के बाद नई व्यवस्था लागू नहीं हो पाई तो इसका खामियाजा आम नागरिकों और शोकाकुल परिवारों को भुगतना उचित नहीं है।प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी का भार जनता पर नहीं डाला जा सकता।उन्होंने कहा कि निगम प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि वर्तमान में मुक्तिधाम में लकड़ी की व्यवस्था किसके माध्यम से की जा रही है,उसकी निर्धारित दर क्या है,किस आदेश के तहत राशि ली जा रही है और ठेका समाप्त होने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई।अंतिम संस्कार के नाम पर किसी भी प्रकार की अनियमित वसूली स्वीकार नहीं की जा सकती।उन्होंने कहा कि गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए अंतिम संस्कार का खर्च पहले ही बड़ी चिंता का विषय होता है। ऐसे में नगर निगम को राहत देने वाली व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए,न कि ऐसी स्थिति बनने देनी चाहिए जहां परिवारों को अंतिम संस्कार के लिए भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़े।

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