रिपोर्टर रोहित वर्मा
लोकेशन खरोरा
*सरस्वती शिशु मंदिर खरोरा में प्रथम मातृ गोष्ठी संपन्न*
खरोरा। सरस्वती शिशु मंदिर खरोरा में प्रथम मातृ गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रीमती हेमकुमारी गिलहरे, विशिष्ट अतिथि श्रीमती तृप्ति गिलहरे एवं श्रीमती कविता कुर्रे तथा विद्यालय के प्राचार्य अश्वनी पाटकर एवं प्रधानाचार्य संजय वर्मा द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
मातृ गोष्ठी में बच्चों के सर्वांगीण विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। श्रीमती पूर्णिमा पाटकर द्वारा बच्चों के संस्कारक्षम वातावरण, आहार-विहार एवं दैनिक दिनचर्या के संबंध में जानकारी दी गई। श्रीमती दमयंती डडसेना ने तीन शैक्षिक व्यवस्थाओं के साथ सुवर्ण प्राशन की जानकारी माताओं को दी। वहीं श्रीमती संतोषी यादव ने भाषा विकास के चार सोपान—सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना—के बारे में विस्तार से बताया।
मुख्य अतिथि श्रीमती हेमकुमारी गिलहरे ने माताओं से बच्चों को पौष्टिक आहार देने तथा उनमें संस्कार विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने बच्चों को बड़ों का सम्मान एवं गुरुजनों का आदर करना सिखाने की बात कही।
विशिष्ट अतिथि श्रीमती तृप्ति गिलहरे ने कहा कि बच्चे गीली मिट्टी के समान होते हैं, उन्हें जिस रूप में ढाला जाए, वे उसी रूप में ढल जाते हैं। उन्होंने माताओं से बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय बिताने और उनकी गतिविधियों पर ध्यान देने का आग्रह किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं श्रीमती कविता कुर्रे ने कहा कि बच्चों को संस्कारवान एवं चरित्रवान बनाने में माता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। माता ही बच्चे की प्रथम गुरु होती है। बच्चा अपने घर-परिवार और आसपास के वातावरण से बहुत कुछ सीखता है, इसलिए माताओं को बच्चों की गतिविधियों पर सजग दृष्टि रखनी चाहिए।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य संजय वर्मा ने कहा कि भगवान श्रीराम को संस्कारवान बनाने में माता कौशल्या तथा भगवान श्रीकृष्ण के जीवन में उनकी माता का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इसी प्रकार प्रत्येक माता अपने बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
मातृ गोष्ठी में लगभग 60 माताओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम को सफल बनाने में शिशु वाटिका के समस्त आचार्य एवं दीदियों का सहयोग रहा। बालिका शिक्षा की बहनों द्वारा माताओं के हाथों में मेहंदी लगाई गई तथा स्वल्पाहार की व्यवस्था की गई। अंत में शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।