*जातिगत जनगणना पर डॉ. प्रतीक उमरे की बड़ी मांग—OBC के लिए हो अलग कॉलम*

*जातिगत जनगणना पर डॉ. प्रतीक उमरे की बड़ी मांग—OBC के लिए हो अलग कॉलम*

*जातिगत जनगणना पर डॉ. प्रतीक उमरे की बड़ी मांग—OBC के लिए हो अलग कॉलम*
*जातिगत जनगणना पर डॉ. प्रतीक उमरे की बड़ी मांग—OBC के लिए हो अलग कॉलम*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने आगामी जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या का स्पष्ट एवं प्रमाणिक आंकड़ा सुनिश्चित करने के लिए भारत के जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण से मांग की है कि जातिगत जनगणना में ओबीसी के लिए पृथक एवं स्पष्ट कॉलम निर्धारित किया जाए।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि जनगणना में जातिगत आंकड़े एकत्र करने का निर्णय ऐतिहासिक एवं स्वागत योग्य है।लेकिन केवल जाति का नाम दर्ज कर लेना पर्याप्त नहीं है।यदि ओबीसी के लिए अलग एवं स्पष्ट वर्गीकरण नहीं होगा,तो भविष्य में देश और राज्यों में ओबीसी की वास्तविक जनसंख्या का प्रमाणिक आंकड़ा तैयार करने में व्यावहारिक कठिनाइयां आ सकती हैं।उन्होंने कहा कि 14 अगस्त को जारी अधिसूचना में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए अलग अलग कॉलम का प्रावधान किया गया है लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए स्पष्ट स्वतंत्र कॉलम नहीं है।ओबीसी समाज की वास्तविक जनसंख्या, सामाजिक-आर्थिक स्थिति और विभिन्न क्षेत्रों में उसके प्रतिनिधित्व का वैज्ञानिक आकलन तभी संभव होगा,जब जनगणना के स्तर पर ही उसकी पहचान स्पष्ट रूप से दर्ज की जाए।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि जातिगत जनगणना का उद्देश्य केवल जातियों की सूची तैयार करना नहीं बल्कि देश की सामाजिक संरचना का विश्वसनीय सांख्यिकीय चित्र प्रस्तुत करना है।अलग-अलग राज्यों में कई जातियों के स्थानीय नाम,पर्यायवाची नाम,उप-जातियां और वर्तनी अलग-अलग हो सकती हैं।ऐसी स्थिति में यदि व्यक्ति की जाति तो दर्ज हो लेकिन ओबीसी के रूप में उसका स्पष्ट वर्गीकरण न हो तो बाद में आंकड़ों को एकत्रित और विश्लेषित करने में विसंगतियां पैदा हो सकती हैं।जनगणना के आंकड़े भविष्य की सरकारी नीतियों का आधार होते हैं।शिक्षा,रोजगार,कौशल विकास,आर्थिक, सशक्तिकरण,छात्रवृत्ति,स्वरोजगार,सामाजिक सुरक्षा और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर लक्ष्य निर्धारण के लिए विश्वसनीय सामाजिक आंकड़े आवश्यक हैं।उन्होंने कहा कि यदि किसी सामाजिक वर्ग की वास्तविक संख्या और उसकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आंकड़ा ही उपलब्ध नहीं होगा तो उसके लिए बनाई जाने वाली योजनाओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन भी कठिन होगा।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ओबीसी समाज की बड़ी आबादी है।इसलिए प्रदेश के सामाजिक एवं आर्थिक विकास की भविष्य की रणनीति तैयार करने में जातिगत जनसंख्या के प्रमाणिक आंकड़ों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा जातिगत जनगणना को आगे बढ़ाने का निर्णय एक महत्वपूर्ण पहल है।अब आवश्यकता है कि जनगणना की प्रक्रिया को तकनीकी रूप से भी इतना मजबूत बनाया जाए कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राप्त आंकड़े विश्वसनीय संदर्भ बन सकें।उन्होंने जनगणना आयुक्त से आग्रह किया कि आगामी जनगणना की अंतिम प्रक्रिया में ओबीसी के लिए पृथक एवं स्पष्ट कॉलम निर्धारित किया जाए, ताकि ओबीसी समाज की वास्तविक संख्या और सामाजिक स्थिति का वैज्ञानिक एवं पारदर्शी आंकलन संभव हो सके।

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