*"अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखिका डॉक्टर शिरोमणि माथुर के काव्य कृति अंतर ज्योति का डॉ रमन सिंह के हाथों हुआ विमोचन"*

*"अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखिका डॉक्टर शिरोमणि माथुर के काव्य कृति अंतर ज्योति का डॉ रमन सिंह के हाथों हुआ विमोचन"*

*"अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखिका डॉक्टर शिरोमणि माथुर के काव्य कृति अंतर ज्योति का डॉ रमन सिंह के हाथों हुआ विमोचन"*
*"अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखिका डॉक्टर शिरोमणि माथुर के काव्य कृति अंतर ज्योति का डॉ रमन सिंह के हाथों हुआ विमोचन"* 
छत्तीसगढ़ की माटी की साहित्यिक गंध और मां की ममता और मानवता से सराबोर काव्य संग्रह *"अंतर ज्योति"* का विमोचन राजधानी में बड़े सम्मान के साथ हुआ। शहर की वरिष्ठ समाजसेविका एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित साहित्यकार, कवियित्री डॉ. शिरोमणि माथुर को विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सम्मानित किया।

अगसदिया परिवार एवं वैभव प्रकाशन के संयुक्त iतत्वावधान में विधानसभा अध्यक्ष के निजी सभा कक्ष में "सम्मान, पुस्तक विमोचन एवं व्याख्यान" का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर तीन पुस्तकों का विमोचन हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्व, आपदा प्रबंधन, पुनर्वास एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने की।
 *डॉ. रमन सिंह: "रचनाओं में ममता और माटी की महक"*
डॉ. रमन सिंह ने डॉ. शिरोमणि माथुर को शाल, श्रीफल, प्रतीक चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया। इसके बाद उनके काव्य संग्रह "अंतर ज्योति" का विमोचन किया।

डॉ. रमन सिंह ने कहा - _"मां की हर रचना में ममता और छत्तीसगढ़ की माटी की महक के साथ-साथ मानवीयता महसूस होती है। डॉ. शिरोमणि माथुर जी की साहित्य साधना इस उम्र में भी अविरल चल रही है। यह अपने आप में प्रेरणादायक और वंदनीय है।"

उन्होंने आगे कहा - "उम्र के इस पड़ाव में जब हाथ कांपने लगते हैं, कदम डगमगाने लगते हैं और आंखें जवाब देने लगती हैं, तब भी माताजी कलम के माध्यम से समाज को दिशा दे रही हैं। उनकी यह साधना स्तुत्य है।"
डॉ. रमन सिंह ने डॉ. माथुर को स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रदेश को ऐसे साहित्यकारों पर गर्व है। उन्होंने डॉ. माथुर के साथ साये की तरह खड़े रहने वाले उनके सुपुत्र युवा उद्यमी आशुतोष माथुर की मातृभक्ति और समाजसेवी पहल की भी सराहना की।

 *मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा - "परिवार प्रेरणा है"*
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि डॉ. शिरोमणि माथुर और माथुर परिवार का सामाजिक और साहित्यिक योगदान अनुकरणीय है। उन्होंने कहा - "आशुतोष माथुर जैसे युवा जब साहित्य और समाजसेवा में रुचि लेते हैं, तो समाज को नई दिशा मिलती है। ऐसे परिवारों से युवा पीढ़ी को प्रेरणा लेनी चाहिए।"

 *"अंतर ज्योति" - तनाव के युग में प्रेम का संदेश*

अपनी पुस्तक "अंतर ज्योति" के बारे में डॉ. शिरोमणि माथुर ने विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि आज का मानव मानसिक रूप से बहुत परेशान है।

"आज हर तरफ वाक् युद्ध और शीत युद्ध चल रहे हैं। जन्म से मृत्यु तक मानव संघर्षरत है। तनाव के कारण लोग अपनों से झगड़ते हैं, लड़ते हैं। कहीं हत्या तो कहीं आत्महत्या हो रही है। ऐसी जिंदगी कब तक चलेगी?"

डॉ. माथुर ने कहा कि उनकी रचनाएं इसी अशांति का समाधान खोजती हैं। "मेरा साहित्य संसार को प्रेम, शांति और आनंद देने के लिए रचा गया है। जीवन को आनंदमय कैसे बनाया जाए, समाज में शांति और पवित्रता कैसे लाई जाए - यही मेरा उद्देश्य है। आज मानव सच्चे प्रेम का प्यासा है। हमारे अंदर प्रेम है, बस उसे निकालने की देरी है।"

 *कविता पाठ: "दुआएं बाजार में नहीं मिलतीं"*

 डॉ. माथुर ने "अंतर ज्योति" की कुछ रचनाएं भी सुनाईं। उन्होंने कहा - _"अपने अंदर की ज्योति जलाने से सारा जग जाग जाएगा। इसके लिए कुछ नहीं करना, बस दुआएं देनी हैं।"

अंधेरा मन में बसा, मंदिर दीप जलाएं।
अंतर ज्योति जगाइए, सारा जग जाए।

सदा दुआएं दीजिए, काम दुआएं आए।
पैसा से मिलती दुआ, दुआ न हाट बिकाय।

नहीं रंग है दुआ का,
नहीं दिखाई देय।
लग जाती किसी को,
सभी रंग भर देय।।
कविता के बाद उन्होंने कहा - "देखिए, दुआ का कोई रंग नहीं होता। जब किसी को लग जाती है तो जीवन में सभी रंग भर देती है। बस मेरा उद्देश्य यही है - सभी को प्रेम बांटो, सभी को दुआएं दो। ताकि संसार से दुख और अशांति दूर हो जाए।"

*अन्य साहित्यकार भी हुए सम्मानित*

इस अवसर पर साहित्यिक संस्था अगसदिया परिवार ने डॉ. रजनी नेल्सन, दिनेश चौहान,साहित्यकार गिरीश पंकज ,कैलाशचंद जैन बरमेचा और यमुनोत्री वर्मा को भी सम्मानित कर तीन नई कृतियों का विमोचन किया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यकार, समाजसेवी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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