प्रेस विज्ञप्ति:
*परमात्मा से जुड़ने पर जीवन में मिलता है सच्चा सुख और शांति : बीके गोविंद भाई*
बिलासपुर, 27 जुलाई 2026। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में एक आध्यात्मिक ज्ञान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय आबू राज (राजस्थान) के ज्ञान सरोवर से पधारे वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षक बीके गोविंद भाई ने आध्यात्मिक जीवन, आत्मबल और सकारात्मक सोच पर प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए।
अपने संबोधन में बीके गोविंद भाई ने कहा कि आज हर व्यक्ति सुख, शांति और खुशी की तलाश में है। लोग भौतिक सुविधाएँ तो प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन मन की शांति उनसे नहीं मिलती। वास्तविक सुख तब मिलता है जब मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप अर्थात आत्मा को पहचानकर परमात्मा से अपना संबंध जोड़ता है। ईश्वर की याद मन को स्थिर बनाती है और जीवन में आत्मविश्वास, धैर्य तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के अनेक देशों से लोग आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए आते हैं, लेकिन सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि स्वयं परमात्मा मानवता का मार्गदर्शन करने के लिए इस धरती पर ज्ञान का प्रकाश देते हैं। यही ईश्वर का अपने बच्चों के प्रति असीम प्रेम है।
बीके गोविंद भाई ने कहा कि जीवन की सबसे बड़ी सफलता दूसरों पर नहीं, बल्कि स्वयं पर विजय प्राप्त करना है। यदि मनुष्य अपने मन, विचारों, भावनाओं और आदतों को नियंत्रित करना सीख ले, तो वह किसी भी परिस्थिति में शांत और प्रसन्न रह सकता है। उन्होंने कहा कि परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि हमारे विचार हमारे सुख और दुःख का कारण बनते हैं। इसलिए सबसे पहले अपने मन का स्वामी बनना आवश्यक है।
उन्होंने वर्तमान समय की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज तनाव, चिंता, क्रोध और असुरक्षा जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कुछ समय मौन और ध्यान का अभ्यास करना चाहिए। इससे मानसिक शक्ति बढ़ती है, निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है और जीवन में संतुलन बना रहता है।
बीके गोविंद भाई ने कहा कि आज समाज को केवल भौतिक विकास नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागृति की आवश्यकता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन कुछ मिनट अपने परिवार, समाज और विश्व के कल्याण के लिए सकारात्मक संकल्प करे, तो उसका अच्छा प्रभाव पूरे वातावरण पर पड़ता है। सकारात्मक विचार भी समाज सेवा का एक प्रभावी माध्यम हैं।
उन्होंने प्रातःकाल के समय को विशेष महत्व देते हुए कहा कि सुबह का शांत वातावरण ध्यान और आत्मचिंतन के लिए सबसे उपयुक्त होता है। दिन की शुरुआत यदि कुछ मिनट ईश्वर की याद, सकारात्मक विचार और आत्मनिरीक्षण से की जाए, तो पूरा दिन उत्साह, शांति और ऊर्जा से भर जाता है। प्रतिदिन आत्मचिंतन कर, अपनी किसी एक कमी को चुनकर उसे सुधारे तथा दिन के अंत में स्वयं का मूल्यांकन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे सकारात्मक परिवर्तन ही आगे चलकर व्यक्तित्व को महान बनाते हैं।
कार्यक्रम के अंत में सेवाकेंद्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में मानसिक शांति सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। राजयोग मेडिटेशन व्यक्ति को स्वयं से जोड़ता है, तनाव कम करता है और जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान का नियमित अध्ययन जीवन को सही दिशा देता है। इससे व्यक्ति अपने दोषों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करता है और उसके भीतर धैर्य, विनम्रता, प्रेम, सहनशीलता और सहयोग जैसे श्रेष्ठ गुण विकसित होते हैं।
ईश्वरीय सेवा में,
बीके स्वाति दीदी
राजयोग भवन, बिलासपुर