*सुबह पोहा-चना-शरबत वितरण, रात 1001 दीपों की महा आरती: दल्ली राजहरा में धूमधाम से मनाई गुरुदेव कबीर साहेब जयंती*

*सुबह पोहा-चना-शरबत वितरण, रात 1001 दीपों की महा आरती: दल्ली राजहरा में धूमधाम से मनाई गुरुदेव कबीर साहेब जयंती*

*सुबह पोहा-चना-शरबत वितरण, रात 1001 दीपों की महा आरती: दल्ली राजहरा में धूमधाम से मनाई गुरुदेव कबीर साहेब जयंती*
*सुबह पोहा-चना-शरबत वितरण, रात 1001 दीपों की महा आरती: दल्ली राजहरा में धूमधाम से मनाई गुरुदेव कबीर साहेब जयंती*

 सतगुरु कबीर साहेब की जयंती लौह नगरी में श्रद्धा, सेवा और रोशनी के संगम के साथ मनाई गई। मानिकपुरी पनिका समाज ने दिनभर चले कार्यक्रमों में नगरवासियों को कबीर के दोहों से जोड़ने का काम किया।
 
कार्यक्रम की शुरुआत जैन भवन चौक से हुई। गुरुदेव कबीर साहेब की तस्वीर की पूजा-अर्चना के बाद मानिकपुरी पनिका समाज ने हजारों नगरवासियों के लिए प्रसादी के रूप में गर्म पोहा, चना और मीठा शरबत वितरित किया। दोपहर तक चौक में भीड़ लगी रही और हजारों लोगों ने कबीर के सेवा भाव को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया।
मानिकपुरी पनिका समाज के नगर अध्यक्ष रामदास मानिकपुरी ने कहा, कबीर साहेब सिर्फ संत नहीं, एक बड़े समाज सुधारक थे। उनका दोहा - बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय - हमें सिखाता है कि मन साफ रखो। माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोय - यह समानता का संदेश है। कबीर खड़े बाजार में, सबकी मांगे खैर - यह पूरी दुनिया के लिए मंगल कामना है।
*रात: रोशनी का रंग*  
शाम होते ही कबीर मंदिर का माहौल भक्तिमय हो गया। समाज के सैकड़ों महिला-पुरुषों की उपस्थिति में 1001 दीपों के साथ भव्य महा आरती की गई। दीपों की लौ में पूरा मंदिर जगमगा उठा और साहेब बंदगी साहेब के जयकारे से आकाश गूंज उठा। 
दीप जलाते हुए सभी ने सतगुरु कबीर के बताए मार्ग पर चलने, नशे-झूठ-लालच से दूर रहने और निर्गुण भक्ति व मानवता को अपनाने का संकल्प लिया। 

कबीर साहेब की इस जयंती ने एक बार फिर साबित किया कि कबीर कोई संप्रदाय नहीं, बल्कि जीवन जीने की सोच हैं। और दल्ली राजहरा का भाईचारा उसी सोच का सबसे बड़ा उदाहरण है।
मानिकपुरी पनिका समाज नगर इकाई के अध्यक्ष श्री रामदास जी दल्ली राजहरा के नागरिको को सद्गुरु कबीर साहेब की जयंती की हार्दिक बधाई देते हुए बताया इस कार्यक्रम में समाज के सभी पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे साथ ही इस कार्यक्रम को सफल बनाने में गणेश दास, दुर्योधन दास, तनुश्री कोषाध्यक्ष, कुंज मानिकपुरी, गौरी मानिकपुरी, पिंगला दास, लक्की दास, कन्हैया दास , दयाल दास, शैलेन्द्र दास,तीर्थ दास,संतोष दास, रमेश दास, नागेश दास,महंत सागर दास, गजेन्द्र दास और समाज के बहुत से लोग उपस्थित थे।

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