*स्कूली पाठ्यक्रम में शारीरिक शिक्षा अनिवार्य हो–रीतेश सिंह*

*स्कूली पाठ्यक्रम में शारीरिक शिक्षा अनिवार्य हो–रीतेश सिंह*

*स्कूली पाठ्यक्रम में शारीरिक शिक्षा अनिवार्य हो–रीतेश सिंह*
रिपोर्टर रोहित वर्मा 
खरोरा 

*स्कूली पाठ्यक्रम में शारीरिक शिक्षा अनिवार्य हो–रीतेश सिंह*

खरोरा। 
कहते हैं "स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है", इस सार्वभौमिक सत्य के बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक की कक्षाओं में शारीरिक शिक्षा का लागू नहीं होना, समय सारणी से खेल के कालखण्ड (पीरियड) अनिवार्य निर्धारित नहीं होने से प्रदेश के खेल जगत और शिक्षक वर्ग में भारी असंतोष है।
शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष रीतेश सिंह ने इस विषय पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि आज जब पूरा विश्व योग, खेल और शारीरिक शिक्षा गतिविधियों के माध्यम से नई पीढ़ी के शारीरिक, मानसिक एवं बौद्धिक विकास की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब छत्तीसगढ़ में शारीरिक शिक्षा,खेल को लेकर सरकार कितनी गंभीर है, यह उसके निर्णय से साफ पता चलता है। विद्यालयों की समय सारणी से शारीरिक शिक्षा,खेल का अनिवार्य कालखण्ड नहीं होने से व्यायाम शिक्षक इस बात को लेकर अत्यंत चिंतित हैं कि वे शालाओं में अपनी उपस्थिति कैसे साबित करेंगे।
 सिंह ने आगे रेखांकित किया कि प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्तर के विद्यालय ही वे स्थान होते हैं जहाँ से भविष्य के खिलाड़ी तैयार होते हैं और यहीं से खिलाड़ियों की मजबूत नींव तैयार होती है। प्राथमिक स्तर पर बहुत सारी महत्वपूर्ण गतिविधियों को खेल-खेल में ही सिखाया जाता है, इसलिए इस शारीरिक शिक्षा की ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ के प्रदेश पदाधिकारियों ने शासन से पुरजोर मांग की है कि शारीरिक शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम में एक अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया जाए, जिससे प्रदेश के बच्चों का शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास सुचारू रूप से हो सके।

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