*आध्यात्मिक जागृति और अज्ञानता के अंधकार को मिटाने का पर्व है गुरु पूर्णिमा: बीके स्वाति*

*आध्यात्मिक जागृति और अज्ञानता के अंधकार को मिटाने का पर्व है गुरु पूर्णिमा: बीके स्वाति*

*आध्यात्मिक जागृति और अज्ञानता के अंधकार को मिटाने का पर्व है गुरु पूर्णिमा: बीके स्वाति*
प्रेस विज्ञप्ति।

*आध्यात्मिक जागृति और अज्ञानता के अंधकार को मिटाने का पर्व है गुरु पूर्णिमा: बीके स्वाति*
बिलासपुर, 28 जुलाई 2026। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन की संचालिका बीके स्वाति दीदी ने गुरु पूर्णिमा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा केवल किसी व्यक्ति विशेष के सम्मान का पर्व नहीं है, बल्कि आत्मा को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाले परम सद्गुरु को स्मरण करने का पावन अवसर है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में मनुष्य बाहरी उपलब्धियों के बावजूद मानसिक अशांति, तनाव, भय और असंतोष का अनुभव कर रहा है। इसका मुख्य कारण आत्मिक ज्ञान का अभाव है। जब तक मनुष्य स्वयं को केवल शरीर समझता है, तब तक वह सुख और शांति की वास्तविक अनुभूति नहीं कर सकता। सच्चा गुरु वही है जो आत्मा का परिचय कराए, जीवन का वास्तविक उद्देश्य बताए तथा परमात्मा से संबंध जोड़कर जीवन को श्रेष्ठ बनाए।
बीके स्वाति दीदी ने कहा कि परमपिता परमात्मा शिव समस्त आत्माओं के एकमात्र सद्गुरु हैं। वे निराकार, ज्योतिर्बिंदु स्वरूप, ज्ञान के सागर, शांति के सागर तथा प्रेम के सागर हैं। जब संसार में अज्ञान, अशांति और नैतिक पतन बढ़ जाता है, तब स्वयं परमात्मा इस धरा पर आकर राजयोग एवं आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से मानवता का मार्गदर्शन करते हैं। उनका दिव्य ज्ञान मनुष्य के जीवन को नई दिशा प्रदान करता है और आत्मिक शक्तियों को जागृत करता है।
उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा का वास्तविक संदेश बाहरी रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं है, बल्कि अपने जीवन में दिव्य गुणों को धारण करने का संकल्प लेना है। यदि हम क्रोध के स्थान पर शांति, घृणा के स्थान पर प्रेम, स्वार्थ के स्थान पर सेवा तथा अहंकार के स्थान पर विनम्रता को अपनाएँ, तभी गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा प्रकट होती है। गुरु का सम्मान केवल पूजा या माल्यार्पण से नहीं, बल्कि उनके द्वारा बताए गए श्रेष्ठ मार्ग पर चलने से होता है।
बीके स्वाति दीदी ने आगे कहा कि व्यक्ति अपने मन और बुद्धि को परमात्मा से जोड़कर आंतरिक शक्ति प्राप्त करता है। इससे नकारात्मक विचार समाप्त होते हैं, निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है तथा जीवन में संतुलन और सकारात्मकता आती है। जब आत्मा परमात्मा के ज्ञान और शक्ति से भर जाती है, तब वह स्वयं भी समाज में शांति और सद्भाव का माध्यम बन जाती है।
उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रत्येक व्यक्ति कुछ समय आत्मचिंतन, आत्मपरिवर्तन और परमात्मा की याद में अवश्य लगाए। यही इस पर्व का वास्तविक आध्यात्मिक संदेश है। जब प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर श्रेष्ठ संस्कारों का विकास करेगा, तब परिवार, समाज और राष्ट्र में भी सुख, शांति और नैतिक मूल्यों की स्थापना होगी।
ईश्वरीय सेवा में,
बीके स्वाति दीदी
राजयोग भवन, बिलासपुर

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