विश्व तंबाकू निषेध दिवस (31 मई 2026) के अवसर पर विशेष पर अपने साझा विचार समाज सेवक प्रशांत कुमार क्षीरसागर मे बताया है।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस (31 मई 2026) के अवसर पर विशेष पर अपने साझा विचार समाज सेवक प्रशांत कुमार क्षीरसागर मे बताया है।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026: युवाओं को निकोटीन के जाल से बचाना जरूरी
दुनिया भर में आज 31 मई 2026 को 'विश्व तंबाकू निषेध दिवस' मनाया जा रहा है। इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा घोषित मुख्य उद्देश्य तंबाकू कंपनियों की उन चालाकियों को उजागर करना है, जिनके जरिए वे आकर्षक विज्ञापनों का इस्तेमाल करके नई पीढ़ी को अपना शिकार बना रही हैं।
नया रूप, वही जानलेवा खतरा
बदलते दौर में तंबाकू उद्योग ने पारंपरिक सिगरेट और बीड़ी से आगे बढ़कर नए उत्पाद बाजार में उतारे हैं। आजकल युवाओं और बच्चों को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग फ्लेवर वाले ई-सिगरेट (वेप), निकोटीन पाउच और सिंथेटिक निकोटीन का सहारा लिया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के ताजा आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में 13 से 15 वर्ष के लगभग 4 करोड़ किशोर तंबाकू का सेवन कर रहे हैं और करीब 1.5 करोड़ युवा ई-सिगरेट के आदी हो चुके हैं।
भारत में तंबाकू का बढ़ता बोझ
तंबाकू नियंत्रण की दिशा में कार्यरत विभिन्न स्वास्थ्य संगठनों की रिपोर्ट के मुताबिक:
* सालाना मौतें: भारत में हर साल तंबाकू जनित बीमारियों के कारण लगभग 13.5 लाख लोगों की जान चली जाती है।
* दैनिक आंकड़ा: देश में रोजाना करीब 3,700 से अधिक लोग तंबाकू के दुष्प्रभावों के कारण दम तोड़ते हैं।
* कैंसर का कारण: भारत में होने वाले कुल कैंसर के मामलों में 27% हिस्सेदारी अकेले तंबाकू के सेवन की है।
* चबाने वाला तंबाकू: भारत दुनिया में तंबाकू का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जहां गुटका, खैनी और जर्दा जैसी बिना धुएं वाली चीजों का चलन सबसे अधिक है।
स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
चिकित्सकों के अनुसार, तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन फेफड़ों के कैंसर, मुंह का कैंसर, हृदय रोग (हार्ट अटैक) और स्ट्रोक के खतरे को दोगुना कर देता है। इसके धुएं में कम से कम 70 ऐसे रसायन होते हैं जो सीधे तौर पर कैंसर को जन्म देते हैं। सिर्फ धूम्रपान करने वाले ही नहीं, बल्कि उनके पास खड़े रहने वाले लोग (पैसिव स्मोकर्स) भी इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।
## कैसे टूटे चक्र? सामूहिक प्रयास की जरूरत
इस वर्ष का अभियान सरकारों और समाज से डिजिटल मीडिया पर तंबाकू के विज्ञापनों को पूरी तरह प्रतिबंधित करने और इन आकर्षक उत्पादों पर सख्त नियम लागू करने की मांग करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू छोड़ने के लिए केवल इच्छाशक्ति काफी नहीं है, बल्कि इसके लिए सही मनोवैज्ञानिक परामर्श और निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी (NRT) जैसी वैज्ञानिक मदद की आवश्यकता है।
आइए, इस तंबाकू निषेध दिवस पर हम सब मिलकर तंबाकू के इस छलावे को समझें और आने वाली पीढ़ी को एक स्वस्थ, धुआं-मुक्त भविष्य देने का संकल्प लें!