*पानी भी सुनता और समझता है हमारे विचार - बीके स्वाति दीदी*
28 अप्रैल 2026, बिलासपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की बिलासपुर मुख्य शाखा टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में चल रहे 'बाल संस्कार शिविर' के पांचवें दिन बच्चों को मानसिक सशक्तिकरण और नैतिक मूल्यों का पाठ पढ़ाया गया। शिविर में मुख्य वक्ता और सेवाकेंद्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे विचार ही हमारे भविष्य और हमारे स्वास्थ्य की नींव रखते हैं।
*आभामंडल (Aura) और विचारों का प्रभाव -* सत्र की शुरुआत करते हुए बीके स्वाति दीदी ने बच्चों को 'आभामंडल' (Aura) के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि हमारे शरीर के चारों ओर एक सूक्ष्म ऊर्जा क्षेत्र होता है, जिसे हिंदी में 'आभामंडल' कहा जाता है। उन्होंने कहा, हम जैसा सोचते हैं और जो अनुभव करते हैं, उसी के अनुरूप हमारे आभामंडल का रंग और ऊर्जा बदलती है। जब हम क्रोध करते हैं, किसी से ईर्ष्या रखते हैं, अपशब्दों या गाली का प्रयोग करते हैं या अत्यधिक जिद्दी बन जाते हैं, तो यह नकारात्मक ऊर्जा हमारे आभामंडल को धुंधला और कमजोर कर देती है। दीदी ने स्पष्ट किया कि एक दूषित आभामंडल न केवल हमारे मानसिक स्वास्थ्य को बिगाड़ता है, बल्कि हमारे भाग्य और व्यक्तित्व पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।
*इमोशनल रेगुलेशन - भावनाओं का सकारात्मक प्रबंधन-* बच्चों के व्यवहारिक विकास पर जोर देते हुए स्वाति दीदी ने 'इमोशनल रेगुलेशन' (भावनात्मक नियंत्रण) का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि आज के समय में बच्चों के लिए अपने गुस्से, डर और उदासी जैसी भावनाओं को सही दिशा देना बहुत जरूरी है। उन्होंने बच्चों को कुछ सरल अभ्यास कराए जिससे वे अपनी भावनाओं को सकारात्मक तरीके से नियंत्रित कर सकें। उन्होंने बताया कि परिस्थितियां कैसी भी हों, शांत रहकर प्रतिक्रिया देना ही असली शक्ति है। शांत मन से लिए गए निर्णय हमेशा सही होते हैं।
*डॉ. मसारू इमोटो और जल का रहस्य -* वैज्ञानिक दृष्टिकोण साझा करते हुए स्वाति दीदी ने सुप्रसिद्ध जापानी वैज्ञानिक डॉ. मसारू इमोटो के प्रयोग का उदाहरण दिया। उन्होंने विचारों का पानी पर पड़ने वाले प्रभाव का स्लाइड शो के माध्यम से बच्चों को इन वैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू कराया कि किस प्रकार पानी पर हमारे विचारों और शब्दों का सीधा प्रभाव पड़ता है। डॉ. इमोटो के प्रयोगों से सिद्ध हुआ है कि जब हम पानी को प्यार, कृतज्ञता और शांति के विचार देते हैं, तो उसके क्रिस्टल सुंदर और व्यवस्थित बनते हैं। इसके विपरीत, घृणा या क्रोध के शब्दों से पानी की संरचना बिगड़ जाती है। दीदी ने बच्चों से कहा, हमारा शरीर 70 प्रतिशत जल से बना है। यदि हम हर पल श्रेष्ठ सोचेंगे, तो हमारे शरीर का पानी अमृत बन जाएगा, जिससे हम हमेशा स्वस्थ और खुशहाल रहेंगे।
*पुण्य कर्मों का संचय -* सत्र के अंत में दीदी ने बच्चों को 'पुण्य कर्म' करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता केवल पढ़ाई से नहीं, बल्कि दुआओं से मिलती है। प्रतिदिन हमें कम से कम कुछ ऐसे कार्य करने चाहिए जिससे दूसरों के चेहरे पर मुस्कान आए। बड़ों का सम्मान करना, जीव-जंतुओं के प्रति दया भाव रखना और निस्वार्थ भाव से सेवा करना ही हमारे संचित पुण्य बढ़ाता है।
शिविर में बड़ी संख्या में उपस्थित बच्चों ने राजयोग के अभ्यास के माध्यम से मन की शांति का अनुभव किया। खेल-खेल में बच्चों को एकाग्रता बढ़ाने के गुर भी सिखाए गए।
ईश्वरीय सेवा में,
बीके स्वाति,
ब्रह्माकुमारीज़ – राजयोग भवन, बिलासपुर