*दुर्ग जिले के डीएमएफ कार्यों का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष विशेष ऑडिट कराया जाए- डॉ. प्रतीक उमरे*

*दुर्ग जिले के डीएमएफ कार्यों का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष विशेष ऑडिट कराया जाए- डॉ. प्रतीक उमरे*

*दुर्ग जिले के डीएमएफ कार्यों का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष विशेष ऑडिट कराया जाए- डॉ. प्रतीक उमरे*
*दुर्ग जिले के डीएमएफ कार्यों का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष विशेष ऑडिट कराया जाए- डॉ. प्रतीक उमरे*
जिला खनिज संस्थान न्यास के अंतर्गत दुर्ग जिले में ऑडिट एवं रिपोर्टिंग को लेकर गंभीर लापरवाही के विषय को लेकर दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने दुर्ग जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं तथा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि डीएमएफ के स्पष्ट नियमों के अनुसार प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति के तीन माह के भीतर ऑडिट रिपोर्ट तैयार करना एवं वार्षिक प्रतिवेदन को सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य है।इसके बावजूद दुर्ग जिले में यह प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं की गई है।उन्होंने कहा कि दुर्ग जिले में डीएमएफ के अंतर्गत करोड़ों रुपये के कार्य किए गए हैं,लेकिन उनके व्यय का सत्यापन समय पर नहीं किया गया,जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।उन्होंने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट लंबित रहने की स्थिति प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि जब तक कार्यों का समय पर ऑडिट नहीं होगा और जानकारी सार्वजनिक नहीं होगी,तब तक यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता कि योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंच रहा है या नहीं।डीएमएफ फंड जनता के हित में उपयोग होने वाला सार्वजनिक धन है और इसकी जानकारी छिपाना या समय पर उपलब्ध न कराना जनता के अधिकारों का हनन है।जिला प्रशासन द्वारा वित्तीय नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया,समयबद्ध ऑडिट प्रक्रिया को प्राथमिकता नहीं दी गई तथा पारदर्शिता एवं सूचना प्रकटीकरण में गंभीर लापरवाही बरती गई।यह स्थिति न केवल प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाती है,बल्कि शासन की मंशा के विपरीत भी है।

मुख्यमंत्री से की गई प्रमुख मांगें:

- दुर्ग जिले के डीएमएफ कार्यों का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष विशेष ऑडिट कराया जाए।
- लंबित ऑडिट रिपोर्ट एवं वार्षिक प्रतिवेदन को तत्काल सार्वजनिक किया जाए।
- लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
- डीएमएफ कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
- भविष्य में समयबद्ध ऑडिट हेतु सख्त निगरानी तंत्र लागू किया जाए।

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