*राष्ट्रीय कवि संगम इकाई बालोद की मासिक गोष्ठी में गूंजा वंदे मातरम गीत*

*राष्ट्रीय कवि संगम इकाई बालोद की मासिक गोष्ठी में गूंजा वंदे मातरम गीत*

*राष्ट्रीय कवि संगम इकाई बालोद की मासिक गोष्ठी में गूंजा वंदे मातरम गीत*
*राष्ट्रीय कवि संगम इकाई बालोद की मासिक गोष्ठी में गूंजा वंदे मातरम गीत*

*कवि साहित्यकारो ने अपनी श्रेष्ठ रचनाओं का पाठ कर कार्यक्रम को बनाया स्मरणीय*


रचना साहित्य समिति गुरुर के संयोजन में राष्ट्रीय कवि संगम इकाई बालोद के अध्यक्ष कवि भरत बुलंदी की अध्यक्षता में मासिक गोष्ठी का आयोजन रचना साहित्य सदन कोलिहामार गुरुर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि /साहित्यकार,आत्माराम कोशा "अमात्य" छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग जिला समन्वयक राजनांदगाँव थे वहीं, अध्यक्षता भरत बुलंदी अध्यक्ष राष्ट्रीय कवि संगम बालोद जिला इकाई द्वारा की गई। डॉ.अशोक आकाश जिला संयोजक राष्ट्रीय कवि संगम बालोद, दयाल राम गजेन्द्र अध्यक्ष रचना साहित्य समिति गुरुर, गजपति राम साहू उपाध्यक्ष राष्ट्रीय कवि संगम, श्रीमती सुषमा शुक्ला राजनांदगाँव विशेष अतिथि रहे। 
इस दौरान माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ कर राजनांदगाँव से पधारी कवयित्री सुषमा शुक्ला द्वारा मां शारदे की वंदना गान से किया गया। इस दौरान उन्होंने नारी से संबंधित अन्य सशक्त रचनाए सुना कर लोगों को विभोर किया। कवि भरत सिन्हा के विभिन्न रसोद्रेक से पूरित क्षणिकाओ वाली सशक्त संचालन में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ लोक कला धर्मी एवं साहित्यकार आत्माराम कोशा "अमात्य" ने छत्तीसगढ़ी में दया मया व पीरा के गीत सहित देश के राष्ट्र गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर इसके रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को नमन करते हुए यह काव्यात्मक पंक्तियां पढ़ी-- वंदे मातरम गूंजा था,, संन्यासी विद्रोह में / भारतवासी उठ खड़े हुए थे,अंग्रेजो के द्रोह में ।
बंकिमचंद्र ने लिखी कविता,
भरा जोश जन-जन में, 
वंदे मातरम मंत्र बन गया 
मां भारती ,मादरे वतन में ,, सुनाकर उपस्थितों में ओज का संचार किया।
राष्ट्रीय कवि संगम जिला संयोजक डॉ.अशोक आकाश ने राष्ट्रीय कवि संगम के उद्देश्य राष्ट्र जागरण धर्म हमारा पर गंभीर चिंतन करते हुए अपनी बात रखी। पुनू राम गुरुपंच ने संत विनोबा भावे की भू- दान आंदोलन पर अपनी रचना पतरी पतरी भुंइया सकेलिस,बांटिस गरीब गुजारा।विनोबा माहिर होगे ना, गीत सुना कर खूब तालियाँ बटोरी। राजनांदगाँव से पधारे थंगेश्वर साहू ने आपरेशन सिंदूर पर मुक्तक सुनाकर राष्ट्रीय ओज की कविता प्रस्तुत ब किया। क्या कसूर था उन निर्दोष लोगों का,जिनको अपनी जान गंवानी पड़ी।
क्या कुसूर थे बेटों के
 वे नन्हें हाथ, जिन्हें अपनों की लाशें उठानी पड़ी।
थानू राम सिन्हा ने काया खंडी गीत सुनाकर सबको माहौल बना दिया। पूरन माली द्वारा इही बात मोला खटकत है सुनाकर ख़ूब हँसाया।
कवयित्री सुषमा शुक्ला ने सिंगार रस की कविता को भक्ति में ढालकर पूरा वातावरण भक्तिमय कर दिया। मोबाइल पर बहुत सुंदर कविता पढ कर सिद्ध कर दिया कि संवेदना अभी भी जिंदा है।
डाँ.महमल्ला ने फीके पड़ गए रंग गुलाल के ,अपनों सा अभिसार कहाँ है, पढ़ कर मंच को ऊँचाई प्रदान किया उन्होने एक अन्य कविता से रिश्तों को मिठास देते बाबूजी पर सुंदर कविता का वाचन किया। हास्य कवि गजपति साहू ने भी गाँधी जी के उपर अपनी हास्य कविता सुनाकर सबको हँसाया।
जय हो गांधी जय हो तोर।
जग में होवय तोरेच शोर।।
जय गंगान के साथ नशापान के विरुद्ध कविता से खूब हँसाया।
संत दिनेन्द्र दास साहेब ने भी अपने मुक्तक पूछिए मत मेरी धर्म या जाति को मत पूछिए मेरे औकात को एवं राम पर अपनी अद्भुत रचना प्रस्तुत किया। सेवक राम नेले द्वारा रामनवमी पर प्रकाश डालते हुए हँसी-ठहाकों से भर दिया। मुरारी दास ने अपने शोध पत्र के लिए तैयार लेख पढ़ा। डाँ.अशोकआकाश ने मां-बाप पर छंदबद्ध रचना 
मॉं जब भी बीमार हुई तो, घर मैं होते सन्नाटे।
और पिता की बीमारी से, सबको पड़ते झन्नाटे।
पढ़कर परिवार में माता पिता की अहमियत पर प्रकाश डाला उन्होने मोबाइल महिमा का पाठकर खूब गुदगुदाया। भरत बुलंदी ने भी सेवानिवृत्त लोगों को समर्पित संवेदनशील रचना बुढ़ापा घर ले आए।
सच-सच बतलाना यार, तूने क्या खोए क्या पाए।
जवानी नौकरी को दे, बुढ़ापा घर ले आए । का सस्वर वाचन कर सबका दिल जीत लिया। चुटीले अंदाज में संचालन कर रहे कवि भरत सिन्हा ने गाँव की पुरानी यादों को शब्दों की माला में पिरोकर खुशनुमा माहौल और भी रंगीन कर दिया। इस दौरान सेवक राम नेले, पूरन सिंह माली, भरत सिन्हा, मुरारी दास , गालव राम,पुनुराम गुरुपंच, संत दिनेश दास, होरी लाल महमल्ला , थंगेश्वर प्रसाद "मीत" के मुरारी दास, कवयित्री रेशमी साहू रश्मि आदि साहित्य सुधि जन‌ उपस्थित थे। कार्यक्रम में 
रचना साहित्य समिति के अध्यक्ष डी.आर.गजेंद की छत्तीसगढ़ी व्यंग्य रचना का तोला नई दिखथे विकास होवत हे,,,ने खूब वाहवाही लूटी। अंत में आभार प्रदर्शन करते हुए सभा समाप्ति की घोषणा की गई।

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