प्रदूषणकारी उद्योगों के बजाय स्वच्छ एवं रोजगारपरक उद्योगों की मांग – छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना

प्रदूषणकारी उद्योगों के बजाय स्वच्छ एवं रोजगारपरक उद्योगों की मांग – छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना

प्रदूषणकारी उद्योगों के बजाय स्वच्छ एवं रोजगारपरक उद्योगों की मांग – छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना
तिल्दा नेवरा।
दिलीप वर्मा।

प्रदूषणकारी उद्योगों के बजाय स्वच्छ एवं रोजगारपरक उद्योगों की मांग – छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना
जिला रायपुर ग्रामीण छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे स्पंज आयरन प्लांटों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में लगातार स्पंज आयरन उद्योग खुलने से चारों ओर कोयले की राखड़ फैल रही है, जिससे गंभीर प्रदूषण उत्पन्न हो रहा है और आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
सेना के पदाधिकारियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है, जहां “जल, जंगल, जमीन” की सुरक्षा अत्यंत आवश्यक है। लेकिन वर्तमान में प्रदूषणकारी उद्योगों को बढ़ावा मिलने से पर्यावरण और ग्रामीण जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ में ऑटोमोबाइल, मोबाइल निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, साइकिल उद्योग सहित कई ऐसे सेक्टर हैं, जिनमें निवेश की अपार संभावनाएं हैं। ये उद्योग न केवल कम प्रदूषण फैलाते हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी प्रदान कर सकते हैं।
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना का कहना है कि प्रदेश में ऐसे उद्योगों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो पर्यावरण के अनुकूल हों और स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार प्रदान करें। संगठन ने आरोप लगाया कि लगातार विरोध और जनभावनाओं के बावजूद छत्तीसगढ़िया लोगों की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है।
सेना ने सरकार से मांग की है कि प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर नियंत्रण लगाया जाए और स्वच्छ, आधुनिक एवं रोजगारपरक उद्योगों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि छत्तीसगढ़ के साथ-साथ देश भी विकास की दिशा में आगे बढ़ सके।
“जल, जंगल, जमीन की रक्षा करते हुए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना ही हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

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