*आयुष्मान भारत योजना में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों को करें शामिल - डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की है।उन्होंने कहा कि वर्तमान स्वास्थ्य व्यवस्था में गंभीर एवं आईसीयू में भर्ती मरीजों के उपचार के लिए क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है,लेकिन आयुष्मान भारत योजना में इनकी विशेषज्ञ सेवाओं को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिलने से कई गंभीर मरीजों को समय पर उच्च स्तरीय उपचार नहीं मिल पाता।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञ विशेष रूप से आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों के जीवन को बचाने के लिए प्रशिक्षित होते हैं।हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, गंभीर संक्रमण, दुर्घटना, मल्टी ऑर्गन फेल्योर, सेप्सिस और अन्य जटिल बीमारियों में इन विशेषज्ञों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।यदि आयुष्मान भारत योजना में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों को औपचारिक रूप से शामिल किया जाता है तो मरीजों को बेहतर, सुरक्षित और वैज्ञानिक उपचार मिल सकेगा।वर्तमान में आयुष्मान भारत योजना पैकेज आधारित प्रणाली पर संचालित हो रही है, जिसमें आईसीयू और क्रिटिकल केयर सेवाएं तो शामिल हैं, लेकिन क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञों को अलग से प्राथमिकता या अनिवार्यता नहीं दी गई है।कई जिलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, सीमित आईसीयू सुविधाएं और नीति स्तर पर बजट संबंधी चुनौतियों के कारण यह महत्वपूर्ण व्यवस्था अब तक लागू नहीं हो सकी है।इससे गंभीर मरीजों के उपचार की गुणवत्ता प्रभावित होती है और समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा उपलब्ध नहीं हो पाती।उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की भागीदारी से न केवल मरीजों की रिकवरी दर में सुधार होगा बल्कि अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि भी कम होगी,जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर आर्थिक बोझ भी कम पड़ेगा और अधिक मरीजों को योजना का लाभ मिल सकेगा।आयुष्मान भारत जैसी महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है,इसलिए इसमें आधुनिक चिकित्सा विशेषज्ञता को शामिल करना आवश्यक है।डॉ. प्रतीक उमरे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आग्रह किया है कि आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत क्रिटिकल केयर मेडिसिन विशेषज्ञों की सेवाओं को मान्यता देते हुए उन्हें पैनल में शामिल किया जाए तथा आईसीयू आधारित उपचार के लिए अलग से प्रावधान बनाया जाए। इससे छत्तीसगढ़ के सरकारी एवं निजी अस्पतालों में गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सकेगा और राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।