*अर्जुनी में अवैध कबाड़ कारोबार चरम पर, चोरी की वारदातें बढ़ीं : क्या संरक्षण में फल-फूल रहा है नेटवर्क?*
*अर्जुनी में अवैध कबाड़ कारोबार चरम पर, चोरी की वारदातें बढ़ीं : क्या संरक्षण में फल-फूल रहा है नेटवर्क?*
अर्जुनी( रूपेश वर्मा)। अर्जुनी सहित भाटापारा ग्रामीण थाना क्षेत्र में अवैध कबाड़ कारोबार ने खतरनाक रूप ले लिया है। क्षेत्र में घरों, दुकानों और निर्माण स्थलों से लोहे, केबल, मोटर, पाइप और अन्य कीमती सामान की चोरी की घटनाएँ तेजी से बढ़ी हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चोरी का माल सीधे कबाड़ दुकानों तक “लाइनअप” होकर पहुँचता है, जहाँ बिना किसी वैध जाँच-पड़ताल के खरीद लिया जाता है। नतीजा—चोरों के हौसले बुलंद और आम नागरिक परेशान।विद्यानगर, मातर चौक, सब-स्टेशन क्षेत्र और नहर पारा में घरों की बाड़ियों से लोहे के सामान की चोरी की कई शिकायतें सामने आई हैं। पीड़ितों का कहना है कि लिखित व मौखिक शिकायत के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। एक स्थानीय युवक के अनुसार, शिकायत दर्ज कराने के बाद भी पुलिस घटनास्थल पर तीन दिन बाद पहुँची और औपचारिकता निभाकर “जांच जारी है” कहकर लौट गई।
*रात में गाड़ियों से खप रहा माल*
विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि कबाड़ से भरी गाड़ियाँ रात में ही निकलती हैं, ताकि किसी को भनक न लगे। छोटे कबाड़ियों से लेकर बड़े कारोबारियों तक का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है। कभी-कभार “दिखावटी” कार्रवाई होती है, पर कुछ दिनों बाद वही दुकानें फिर गुलजार दिखती हैं। इससे कार्रवाई की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
*पर्यावरण मानकों की खुली अनदेखी*
कई कबाड़ दुकानों पर तारों से तांबा निकालने के लिए खुले में जलाया जाता है, जिससे काला, जहरीला धुआँ उठता है। आसपास के घरों की दीवारों पर कालिख जम रही है और सब्जी बाड़ियों की मिट्टी प्रभावित हो रही है। बिना आवश्यक एनओसी, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र और सुरक्षित निष्पादन के ऐसे कार्य पर्यावरण कानूनों की अवहेलना हैं।
*नियमों की धज्जियाँ—रिकॉर्ड कहाँ, लाइसेंस कहाँ?*
कबाड़ कारोबार के लिए ग्राम पंचायत से लाइसेंस, जीएसटी पंजीकरण, खरीद-बिक्री का स्टॉक रजिस्टर (विक्रेता का विवरण सहित), और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी अनिवार्य है—खासकर ई-वेस्ट या बैटरियों जैसे खतरनाक कचरे के मामले में। व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी के तहत मान्यता भी जरूरी है। स्थानीय नागरिक पूछ रहे हैं—क्या ये दुकानें नियमों का पालन कर रही हैं या ले-देकर धंधा चल रहा है?
*मिलीभगत के आरोप*
क्षेत्र में यह चर्चा तेज है कि संरक्षण के बिना इतना बड़ा नेटवर्क संभव नहीं। थाना प्रभारी पर कबाड़ियों से करीबी संबंध और नरमी बरतने के आरोप लगाए जा रहे हैं। यदि पुलिस निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई करे तो चोरी और अवैध खरीद पर लगाम लग सकती है।
अब सवाल सीधा है—क्या प्रशासन इस संगठित नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई करेगा, या फिर चोरी का माल यूँ ही रात के अंधेरे में खपता रहेगा? क्षेत्रीय नागरिक संयुक्त छापेमारी, लाइसेंस/रिकॉर्ड की सख्त जांच, सीसीटीवी सत्यापन और पर्यावरण मानकों के पालन की तत्काल मांग कर रहे हैं। कार्रवाई नहीं हुई तो कानून-व्यवस्था पर भरोसा और कमजोर होगा।