*दिव्य अनुभूति का केंद्र बना अमरनाथ शिव दर्शन मेला*

*दिव्य अनुभूति का केंद्र बना अमरनाथ शिव दर्शन मेला*

*दिव्य अनुभूति का केंद्र बना अमरनाथ शिव दर्शन मेला*
प्रेस विज्ञप्ति
*दिव्य अनुभूति का केंद्र बना अमरनाथ शिव दर्शन मेला*
हंस पेट्रोल पंप के पास स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, सीपत में आयोजित "अमरनाथ शिव दर्शन मेला" में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। 13 फरवरी से 16 फरवरी तक चार दिवसीय इस आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक मेले में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्राम एवं नगर क्षेत्र से आए भक्तों, माताओं-बहनों, युवाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पूरा परिसर “ओम शांति” के दिव्य वातावरण, आध्यात्मिक शांति और श्रद्धा भाव से सराबोर दिखाई दिया।
ब्रह्मा कुमारीज बिलासपुर की ग्रामीण सेवा क्षेत्र प्रभारी बीके संतोषी दीदी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मेले का उद्देश्य केवल दर्शन कराना ही नहीं, बल्कि समाज में आंतरिक शांति, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देना है। ब्रह्माकुमारी संस्था के माध्यम से राजयोग ध्यान, सकारात्मक सोच और आत्मिक पहचान का संदेश जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है, ताकि व्यक्ति तनावमुक्त, संयमित और सशक्त जीवन जी सके।
इस मेले का मुख्य आकर्षण बर्फ से निर्मित अमरनाथ बाबा का सजीव एवं कलात्मक स्वरूप रहा, जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। अमरनाथ बाबा के साथ अत्यंत सुंदर ढंग से निर्मित अमरनाथ गुफा ने मानो भक्तों को हिमालय की पवित्र यात्रा का आध्यात्मिक अनुभव करा दिया। गुफा के भीतर ओम ध्वनि, प्रकाश, शीतल वातावरण और सुसज्जित प्रतीकों ने दर्शकों को गहरी शांति और आत्मिक अनुभूति प्रदान की।
मेले में नेपाल के सुप्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर का भव्य प्रतिरूप भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस प्रतिरूप के माध्यम से श्रद्धालुओं को भारत-नेपाल की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं की एकता, शिव भक्ति की अखंड धारा और सांस्कृतिक संबंधों का सुंदर संदेश मिला। दर्शकों ने इसे न केवल देखा, बल्कि इसके आध्यात्मिक संदेश को हृदय से अनुभव भी किया।
इसके अतिरिक्त, द्वादश ज्योतिर्लिंगों का अत्यंत कलात्मक और ज्ञानवर्धक चित्रण किया गया, जिसमें देश के विभिन्न पवित्र स्थलों पर स्थित शिवलिंगों की महिमा, उनका आध्यात्मिक महत्व और उनसे जुड़े जीवन मूल्यों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया। यह प्रदर्शनी श्रद्धालुओं के लिए ज्ञान, श्रद्धा और संस्कृति—तीनों का संगम सिद्ध हुई।
मेले का एक विशेष खंड सतयुग की दुनिया के सुंदर चित्रण को समर्पित रहा। इसमें स्वर्णिम युग के पवित्र, सुख-शांतिमय और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण जीवन का दृश्यात्मक प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शनी के माध्यम से दर्शकों को यह संदेश दिया गया कि आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाकर आज के जीवन को भी सुखमय, संतुलित और श्रेष्ठ बनाया जा सकता है। बच्चों और युवाओं में इस खंड को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।
बीके संतोषी दीदी ने बताया कि चार दिवसीय मेले के पश्चात 17 फरवरी 2026 से 21 फरवरी 2026 तक 5 दिवसीय नि:शुल्क राजयोग शिविर का प्रतिदिन सुबह 8:00 से 9:00 एवं सायं 5 से 6 बजे तक आयोजन किया गया है।
ईश्वरीय सेवा में,
बीके संतोषी 
ब्रह्माकुमारीज, सीपत

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