बेमेतरा PWD के ईई पर सरकार और कलेक्टर को गुमराह करने का आरोप, 'सुशासन तिहार' में फर्जी निराकरण का खुलासा
बेमेतरा PWD के ईई पर सरकार और कलेक्टर को गुमराह करने का आरोप, 'सुशासन तिहार' में फर्जी निराकरण का खुलासा
सड़क-नाली निर्माण में धांधली: कार्यपालन अभियंता के विरोधाभासी जवाबों ने खोली पोल, ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
मेघू राणा बेमेतरा। जिले के साजा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सोमईखुर्द से धौराभाठा मार्ग निर्माण में गंभीर अनियमितता और भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) बेमेतरा के कार्यपालन अभियंता (EE) पर आरोप है कि उन्होंने कलेक्टर जनदर्शन और प्रदेश सरकार के 'सुशासन तिहार 2025' पोर्टल पर झूठी जानकारी देकर शिकायतों का कागजी निराकरण कर दिया।
शिकायतों के चक्रव्यूह में फंसा विभाग
दस्तावेजों के अनुसार, इस मार्ग का निर्माण अनुबंध क्रमांक 255/DL/2022-23 के तहत किया गया था। सड़क की घटिया गुणवत्ता और नाली निर्माण न होने पर ग्रामीणों ने दो स्तरों पर शिकायत दर्ज कराई थी:
कलेक्टर जनदर्शन: टोकन क्रमांक 2210225000089 (शिकायतकर्ता – हेमंत बंजारे)
सुशासन तिहार: टोकन क्रमांक 25544208700008 (शिकायतकर्ता – दिनेश मनहरे)
अधिकारी के बयानों में 'यू-टर्न': खुद के ही पत्रों में फंसे ईई
शिकायतों के निराकरण के नाम पर विभाग द्वारा दिए गए अलग-अलग जवाबों ने भ्रष्टाचार की आशंका को पुख्ता कर दिया है:
पहला दावा (अक्टूबर 2025): पत्र क्रमांक 5592 में ईई ने दावा किया कि जून 2025 में सड़क और नाली निर्माण पूर्ण हो चुका है और शिकायत निराधार है।
दूसरा दावा (मई 2025): सुशासन तिहार पोर्टल पर जवाब दिया गया कि ग्राम में नाली निर्माण कार्य 'प्रारंभ' कर दिया गया है।
तीसरा और विरोधाभासी दावा (दिसंबर 2025): पत्र क्रमांक 6424 में विभाग ने स्वीकार किया कि नाली निर्माण नहीं हुआ है और इसके लिए नई निविदा (टेंडर) बुलाई जाएगी। साथ ही जांच के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजेश कुमार बाजपेयी एवं उप अभियंता भाई राम मरकाम की समिति गठित की गई।
राशि के बंदरबांट की आशंका
ग्रामीणों का आरोप है कि जब विभाग एक बार लिखित में कार्य पूर्ण होने की रिपोर्ट दे चुका है, तो दोबारा उसी कार्य के लिए टेंडर की बात करना स्पष्ट करता है कि पहले बिना कार्य किए ही राशि आहरित करने की कोशिश की गई है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि कार्यपालन अभियंता, एसडीओ, उप अभियंता और ठेकेदार की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी, की ये मांगें:
पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
भ्रामक जानकारी देकर शासन को गुमराह करने वाले दोषी अधिकारियों को निलंबित किया जाए।
भ्रष्टाचार में लिप्त ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर रिकवरी की जाए।
ग्राम में निर्धारित मापदंडों के अनुसार सड़क और नाली निर्माण सुनिश्चित हो।
"यह सीधे तौर पर सुशासन की मंशा पर प्रहार है। जब अधिकारी पोर्टल पर ही झूठ बोल रहे हैं, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करे? हम इस मामले को लेकर ऊपर तक जाएंगे।"
— हेमंत बंजारे व दिनेश मनहरे (शिकायतकर्ता)