तिल्दा नेवरा।
दिलीप वर्मा।
सरस्वती शिशु मंदिर तिल्दा में वंदे मातरम राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गान
सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तिल्दा सासाहोली में गुरुवार दिनाँक 15 जनवरी को" वन्दे मातरम् " राष्ट्रगीत का सामूहिक रूप से गायन छात्र- छात्राओं, आचार्य- दीदियों एवं जनप्रतिनिधि वार्ड 21 के पार्षद की उपस्थिति में किया गया।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमती रानी सौरभ जैन रही।
उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि वन्दे मातरम् राष्ट्र गीत का 150 वी वर्षगांठ देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर पूरे देश भर में मनाया जा रहा है। इसके पूर्व देश में जितने भी प्रधानमंत्री रहे किसी ने भी वंदे मातरम् राष्ट्रगीत की 50 वीं वर्ष में या 100 वीं वर्ष पूर्ण होने पर ऐसा भव्य रूप में मनाने की कोई विशेष आग्रह देश के नागरिकों के लिए नहीं किया गया। जिस वन्दे मातरम् गीत को गाते हुए आजादी की लड़ाई में अनेकों वीर, क्रांतिकारियों एवं महापुरुषों ने अपने प्राणों की बाजी लगा दी उस वन्देमातरम् राष्ट्रगीत की 150 वीं वर्षगांठ को पूरे देश भर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है ये हम सब के लिए प्रेरणा दायी है। वंदे मातरम् का अर्थ है मैं अपनी मातृभूमि को प्रणाम करता हूँ/करती हूँ। यह भाव प्रत्येक भारतवासियों के मन में अवश्य होना चाहिए।
इस अवसर पर बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम के अन्तर्गत देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया गया। तत्पश्चात् विद्यालय के प्राचार्य श्रवण कुमार साहू ने वन्दे मातरम् के इतिहास के बारे बताया गया है कि सन् 1875 के आसपास वंदे मातरम् गीत गाया गया। इसके कवि बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय जी ने इस गीत को बांग्ला और संस्कृत भाषा में लिखा है। 28 दिसम्बर सन् 1896 में कांग्रेस महासभा के अधिवेशन में रविन्द्र टैगोर द्वारा गाया गया है जो कि 65 सेकंड का था। सन् 1882 में बंकिमचन्द्र चटर्जी के पुस्तक आनंद मठ में प्रकाशित हुआ।परन्तु कुछ समुदाय के लोगों को वंदे मातरम् की दो पद को छोड़कर आगे के पदो की पंक्तियों में आपत्ति थी कि हम किसी देवी को नहीं मानते है हमारे धर्म के विपरीत है इसलिए सिर्फ दो पद को ही सन् 1950 में ही राष्ट्रगीत की स्वीकृति दे दी गई तब से दो पद को ही गया जा रहा है।वन्दे मातरम् राष्ट्र गीत पर हम सबको गर्व होना चाहिए कि जिस गीत को गाते- गाते आजादी की लड़ाई में अनेकों क्रांतिकारियों में ऊर्जा का संचार कर दिया गया और हंसते -हंसते फांसी को भी गले लगा लिये। देश के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी। जिनके बदौलत हमें यह आजादी मिली है। इस गीत पर हम सब भारत वासियों को गर्व होना चाहिए। बहिन निष्ठा ने भी वन्दे मातरम् राष्ट्र गीत के बारे में बताया कि स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में वंदे मातरम् राष्ट्रगीत हर क्रांतिकारियों के कंठों में गूंज उठा।
बहिन दीक्षा वर्मा ने वंदे मातरम् गीत का भावार्थ सबको बताते हुए कहा कि इस गीत में भारतमाता की वंदना माता दुर्गा, दस भुजा वाली शक्ति की देवी, विद्या की देवी माँ सरस्वती के रूप में की गई है। साथ ही यह भूमि शस्य श्यामला, हरी भरी सुहावनी एवं मंगल मय है। जिसकी वंदना हमें प्रति दिन करनी चाहिए। अंत में सभी बच्चों , आचार्य- दीदियों एवं अतिथियों द्वारा सामूहिक रूप से वन्दे मातरम् राष्ट्रगीत गाकर कार्यक्रम सम्पन्न किया गया।