*आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु आरटीई में प्री-प्राइमरी स्तर से प्रवेश की व्यवस्था बहाल की जाए : डॉ. प्रतीक उमरे*

*आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु आरटीई में प्री-प्राइमरी स्तर से प्रवेश की व्यवस्था बहाल की जाए : डॉ. प्रतीक उमरे*

*आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु आरटीई में प्री-प्राइमरी स्तर से प्रवेश की व्यवस्था बहाल की जाए : डॉ. प्रतीक उमरे*
*प्रेस विज्ञप्ति*

*आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु आरटीई में प्री-प्राइमरी स्तर से प्रवेश की व्यवस्था बहाल की जाए : डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में जारी आदेश पर गहरी चिंता व्यक्त की है,जिसमें सत्र 2026-27 से निजी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों का प्रवेश केवल कक्षा 1 से ही संभव होगा।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि पूर्व में RTE के प्रावधानों के तहत यह सुविधा स्कूल की एंट्री लेवल (नर्सरी, प्री-प्राइमरी PP-1, PP-2 या किंडरगार्टन) से उपलब्ध थी, जो 3-6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को प्रारंभिक चरण में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी। प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा बच्चे के भाषा विकास,व्यवहारिक कौशल एवं सीखने की मजबूत नींव रखने में सहायक होती है।इस स्तर पर अच्छे निजी स्कूलों में प्रवेश की सुविधा से हजारों गरीब परिवारों के बच्चे उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा से लाभान्वित हो रहे थे।यह बदलाव आरटीई अधिनियम की मूल भावना,जो शिक्षा में समानता एवं समावेशिता को बढ़ावा देती है के अनुरूप प्रतीत नहीं होता।इससे 3-6 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चे प्रारंभिक शिक्षा के महत्वपूर्ण अवसर से वंचित हो सकते हैं,जिसका दीर्घकालिक प्रभाव उनके शैक्षणिक विकास पर पड़ सकता है।राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी 3-8 वर्ष की आयु को आधारभूत शिक्षा के रूप में मान्यता देती है और इस निर्णय से उस दिशा में प्रयास प्रभावित हो सकते हैं।डॉ. प्रतीक उमरे ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि बच्चों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए इस आदेश पर पुनर्विचार किया जाए तथा आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी स्तर से प्रवेश की पूर्ववर्ती व्यवस्था को शीघ्र बहाल किया जाए।इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को शुरुआती दौर से ही समान अवसर मिल सकेंगे और शिक्षा में असमानता को कम करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाया जा सकेगा।यह निर्णय बच्चों के उज्ज्वल भविष्य एवं समाज की समावेशी प्रगति के लिए आवश्यक है।

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