*“मेडिटेशन से मन, बुद्धि और जीवन में आता है संतुलन – बीके स्वाति दीदी”*

*“मेडिटेशन से मन, बुद्धि और जीवन में आता है संतुलन – बीके स्वाति दीदी”*

*“मेडिटेशन से मन, बुद्धि और जीवन में आता है संतुलन – बीके स्वाति दीदी”*

*“मेडिटेशन से मन, बुद्धि और जीवन में आता है संतुलन – बीके स्वाति दीदी”*
21 दिसम्बर 2025, बिलासपुर। आज के तनावग्रस्त, अशांत और तेज़ गति से भागते हुए समय में जब मनुष्य बाहरी साधनों से सुख और शांति खोजने का प्रयास कर रहा है, तब वास्तविक आवश्यकता है आंतरिक शांति की शक्ति को पहचानने और उसे जीवन में धारण करने की। 
इसी उद्देश्य के साथ "विश्व मेडिटेशन डे" के अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, बिलासपुर की मुख्य शाखा, टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन की संचालिका बीके स्वाति दीदी ने कहा कि आज विश्व की सबसे बड़ी आवश्यकता शांति है, लेकिन यह शांति बाहर से नहीं, बल्कि आत्मा के भीतर से उत्पन्न होती है। शांति आत्मा का मूल स्वरूप है, परंतु व्यर्थ संकल्पों, नकारात्मक भावनाओं और अशुद्ध चिंतन के कारण यह शक्ति दब जाती है। मेडिटेशन वह आध्यात्मिक विधि है जिसके माध्यम से आत्मा पुनः अपने शांति स्वरूप का अनुभव करती है।
दीदी ने बताया कि मेडिटेशन कोई कठिन साधना नहीं, बल्कि आत्मा को उसके वास्तविक स्वरूप में स्थिर करने की सरल प्रक्रिया है। जब हम कुछ समय के लिए बाहरी शोर से हटकर मन और बुद्धि को शांत करते हैं, तब आत्मा की भीतरी शक्तियाँ जागृत होती हैं। शांति की शक्ति केवल स्वयं को ही नहीं, बल्कि आसपास के वातावरण को भी प्रभावित करती है। शांत मन से लिए गए निर्णय सटीक होते हैं और शांत चित्त से किए गए कर्म श्रेष्ठ परिणाम देते हैं।
बीके स्वाति दीदी ने बताया कि आज विज्ञान अत्यधिक प्रगति कर चुका है, परंतु मानसिक तनाव, अवसाद, भय और असुरक्षा की भावना भी उसी अनुपात में बढ़ी है। ऐसे समय में मेडिटेशन शांति की वह शक्ति प्रदान करता है जो मन को स्थिर, बुद्धि को स्पष्ट और जीवन को संतुलित बनाती है। मेडिटेशन के अभ्यास से व्यक्ति की सहनशक्ति बढ़ती है, क्रोध, चिंता और व्यर्थ सोच पर नियंत्रण आता है तथा संबंधों में मधुरता का अनुभव होता है।
उन्होंने कहा कि शांति कोई क्षणिक अनुभव नहीं, बल्कि अभ्यास से विकसित होने वाली स्थायी शक्ति है। नियमित मेडिटेशन से मन में एकाग्रता बढ़ती है, स्मरण शक्ति सशक्त होती है और व्यक्ति परिस्थितियों के प्रभाव में आने के बजाय परिस्थितियों को संभालने में सक्षम बनता है। शांति की शक्ति से व्यक्ति स्वयं तो सशक्त बनता ही है, साथ ही वह दूसरों को भी सकारात्मक ऊर्जा और सहयोग प्रदान कर सकता है।
बीके स्वाति दीदी ने बताया कि मेडिटेशन का अभ्यास किसी विशेष समय या स्थान का मोहताज नहीं है। केवल एक सेकंड का भी सच्चा अभ्यास मन को गहराई से शांत कर सकता है। जब मन और बुद्धि पर आत्मा का नियंत्रण बढ़ता है, तब व्यर्थ संकल्प स्वतः समाप्त होने लगते हैं। यही आत्म-नियंत्रण जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। वर्तमान समय में जब जीवन की गति तेज़ है और परिस्थितियाँ अचानक बदलती हैं, तब शांति की शक्ति व्यक्ति को सजग, सतर्क और संतुलित बनाए रखती है। मेडिटेशन से विकसित शांति हमें प्रतिक्रिया करने के बजाय समझदारी से उत्तर देने की क्षमता देती है। यही कारण है कि आज मेडिटेशन केवल आध्यात्मिक आवश्यकता नहीं, बल्कि मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक स्वास्थ्य का आधार बन चुका है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित साधकों को शांति के संकल्प का अभ्यास भी कराया गया, जिसमें सभी ने कुछ क्षणों के लिए स्वयं को आत्मा के शांति स्वरूप में अनुभव किया। वातावरण में गहन शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ।
दीदी ने अंत में सभी नागरिकों को निःशुल्क राजयोग मेडिटेशन सीखने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, राजयोग भवन, बिलासपुर में प्रतिदिन निःशुल्क मेडिटेशन कक्षाओं का आयोजन किया जाता है। ये कक्षाएँ सुबह 8:00 से 11:00 बजे तक तथा शाम 5:00 से 7:00 बजे के बीच प्रतिदिन एक-एक घंटे के सत्र में संचालित होती हैं, जिनमें कोई भी व्यक्ति अपनी सुविधा अनुसार भाग लेकर राजयोग मेडिटेशन की सरल और वैज्ञानिक विधि सीख सकता है। यह अभ्यास व्यक्ति को स्वयं से जुड़ने, मन और बुद्धि को सशक्त बनाने तथा जीवन में स्थायी शांति और संतुलन स्थापित करने में सहायक है। विश्व मेडिटेशन डे हमें यह स्मरण कराता है कि विश्व परिवर्तन की शुरुआत आत्म-परिवर्तन से होती है, और आत्म-परिवर्तन का आधार है शांति की शक्ति।
ईश्वरीय सेवा में
बीके स्वाति
राजयोग भवन, बिलासपुर

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