*बढ़ते अपराध पर अकुंश लगाने पुलिस गश्त और पेट्रोलिंग की व्यवस्था दुरुस्त करें - भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*
*प्रेस विज्ञप्ति*
*बढ़ते अपराध पर अकुंश लगाने पुलिस गश्त और पेट्रोलिंग की व्यवस्था दुरुस्त करें - भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग जिले में हाल के महीनों में अपराधिक वारदातों में निरंतर वृद्धि हो रही है,जिससे आम जनता में भय और असुरक्षा का माहौल व्याप्त हो गया है।दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने इस बढ़ते अपराध ग्राफ पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए जिला पुलिस अधीक्षक से अपराध नियंत्रण पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस गश्त एवं पेट्रोलिंग की व्यवस्था को सुदृढ़ करने की मांग की है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि जिले में चोरी,लूट,हत्या के प्रयास एवं अन्य संगीन अपराधों की घटनाएं बढ़ रही हैं,जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।आंकड़ों के अनुसार,वर्ष 2025 में दुर्ग जिले में अपराधों का ग्राफ पहले की तुलना में काफी ऊपर चला गया है,जिसमें हत्या एवं हत्या के प्रयास जैसे मामले प्रमुख हैं।इससे न केवल आम नागरिकों का जीवन असुरक्षित हो रहा है,बल्कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है।उन्होंने पुलिस अधीक्षक से आग्रह किया है कि कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए गंभीरतापूर्वक तत्काल कदम उठाए जाएं।विशेष रूप से शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित पुलिस गश्त एवं पेट्रोलिंग की व्यवस्था को मजबूत किया जाए ताकि अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ बना रहे।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि पहले पुलिस विभाग को अपराध एवं अपराधियों की जानकारी कम्युनिटी पुलिसिंग,मोहल्ला सुरक्षा समितियों एवं ग्राम सुरक्षा समितियों के माध्यम से मिलती थी,जो अपराध नियंत्रण में अत्यंत प्रभावी साबित होती थी।किंतु वर्तमान में इन समितियों का गठन एवं सक्रियता लगभग लुप्तप्राय हो चुकी है।अब ऐसा प्रतीत होता है कि अपराध नियंत्रण केवल फेसबुक,व्हाट्सएप एवं अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर कर दिया गया है।निस्संदेह, सोशल मीडिया परंपरागत पुलिसिंग में सहायक तो हो सकता है, किंतु यह उसका विकल्प नहीं बन सकता।उन्होंने पुलिस विभाग से अपील की है कि अपनी कार्यशैली में सकारात्मक एवं प्रभावी बदलाव लाया जाए।केवल कठोर एवं निर्भीक कदमों से ही अपराध पर अंकुश लगाया जा सकता है।यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं की गई,तो जिले की कानून-व्यवस्था और बिगड़ सकती है,जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।