ऐसी दया करो भगवान झूलेलाल की नाम ना विसरे,,, लाल साई

ऐसी दया करो भगवान झूलेलाल की नाम ना विसरे,,, लाल साई

ऐसी दया करो भगवान झूलेलाल की नाम ना विसरे,,, लाल साई

ऐसी दया करो भगवान झूलेलाल की नाम ना विसरे,,, लाल साई

श्री झूलेलाल मंदिर झूलेलाल नगर चकरभाटा में चंद्र दिवस के अवसर पर एक शाम भगवान झूलेलाल के नाम कार्यक्रम आयोजित किया गया इस कार्यक्रम लखनऊ के मशहूर गायक विशाल खट्टर के द्वारा भक्ति भरे भजनों की शानदार प्रस्तुति दी गई कार्यक्रम रात्रि 8:00 बजे भगवान झूलेलाल बाबा गुरमुख दास जी के मूर्ति पर फूल अर्पण कर वह बहराणा साहब की अखंड ज्योत प्रज्वलित करके की गई विशाल खट्टर के द्वारा अपनी मधुर आवाज में कई भक्ति भरे भजन गाए जिसे सुनकर भक्तजन झूम उठे।
लाल आयो आ झूलेलाल आयो आ ज्योति वारो मुहनजो झूलेलाल लाल आयो आ 


सुहरणा रस्ता त सजन ठरे तो मूहंजो मन ज्योतिन वारो तो अचे  


इस दिल में बाबा गुरमुखदास आप रहते हो


वह धरती बड़ी महान है जिसमें बाबा गुरमुखदास विराजमान हैं


जिए मुहंजी सिंध घोरया पहंजी जिंद अबारे वतन ता 

पंखिड़ा ओ पंखिड़ा के इस गीत पर सभी लोगों ने सिंधी सेज की 
इस अवसर पर लाल साई जी के द्वारा भी आए हुए सभी भक्त जनों को चंद्र दिवस की बधाई दी वह अपनी अमृतवाणी में कहा कि विगत एक महा से लगातार धर्म की यात्रा पर निकले हैं वह हर बड़े छोटे शहरों में जाकर सत्संग के माध्यम से भगवान झूलेलाल की महिमा और ज्योति शक्ति उसके बारे में लोगों को जागृत कर रहे हैं बड़ी खुशी की बात है कि लोग अब धीरे-धीरे वापस अपने धर्म की ओर मुड़ रहे हैं वह अपने भगवान झूलेलाल की शक्ति और भक्ति को समझ रहे हैं इस बात को भी समझ रहे हैं कि हमारा अगर कोई रखवाला है तो वह भगवान झूलेलाल है हमारी पहचान अगर है तो वह भगवान झूलेलाल है और हमारी मीठी सिंधी मातृभाषा है हमारा पहनावा है हमारा लोकगीत हमारे सिंधी भजन हमारा खान-पान है हमारे तीज त्यौहार हैं 
हर-हर झूलेलाल घर-घर झूलेलाल का सपना देखा है धीरे-धीरे वो अब आगे बढ़ रहा है आशा है भगवान जी की कृपा होगी यह सपना बहुत जल्द पूरा होगा और हर घर घर में भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना होगी फोटो होगा मूर्ति होगी झूलन का झंडा लहराए गा जिस तरह मछली पानी में रहती है तो खुश रहती है पानी के बाहर निकालो तो मर जाती है बचपन में हम स्कूल में यह सुनते थे मछली रानी मछली रानी जीवन उसका पानी हाथ लगाओ डर जाती है बाहर निकालो मर जाती है।

हम सिंधी लोग भी भगवान झूलेलाल के बिना अधूरे हैं हमारा जीवन भी मृत जैसा है भले आप जिंदा हो लेकिन कोई काम का नहीं जब तक हमारे अंदर भगवान झूलेलाल की ज्योत नहीं जलेगी तब तक हम भी उस मछली की तरह है जो बिना पानी के तड़पती है इतिहास खोल कर देख लो धर्मशास्त्र खोल कर देख लो कहीं भी ऐसा सुनने को देखने को नहीं मिलेगा की भगवान के माध्यम से गुरु मिला है हमेशा गुरु के माध्यम से भगवान की प्राप्ति होती है लेकिन सिंधी समाज में यह प्रथा उल्टी है कि हमें भगवान झूलेलाल के माध्यम से आपको अपने अपने गुरु मिले हैं भगवान झूलेलाल जन्म नहीं लेते तो हम सिंधी भी नहीं होते हमारा धर्म हिंदू धर्म नहीं होता बल्कि दूसरा धर्म होता इसलिए जिसने हमें नया जीवन दिया है हमारे धर्म की रक्षा की है वह आज भी हमारे साथ है हर दुख सुख में हमेशा साथ रहता है उस झूलेलाल को कभी ना भूले

साई जी के द्वारा भक्ति भरा एक भजन गाया गया

ऐसी दया करो भगवान झूलेलाल कि आपका नाम ना विसरे
रहूं कहीं पर भी किसी भी हाल में बस आपका नाम जपता रहूं
आपका नाम ना विसरे 
ऐसी दया करो भगवान झूलेलाल

इस अवसर पर वरुण साई के द्वारा भी अपनी मधुर आवाज में एक भजन गाया

झूलेलाल के दर पर कोई कमी नहीं है प्यारा बस एक बार तो आओ इस दर पर और झोली भर जाती है 
कार्यक्रम के आखिर में आरती की गई प्रार्थना की गई पल्लो पाया गया प्रसाद वितरण किया गया
आम भंडारे का आयोजन किया गया बड़ी संख्या में भक्तजनों ने भंडारा ग्रहण किया साईं जी के द्वारा ढोल बाजे के साथ पूज्य बहराणा साहब को मंदिर से लेकर तलाब पहुंचे यहां पर विधि विधान के साथ बहराणा साहब को विर्सजन किया गया अखंड ज्योत को तराया गया।

आज के इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में भक्तजन बिलासपुर चकरभाटा मुंगेली तखतपुर रायपुर दुर्ग भाटापारा व अन्य कई शहरों से आए थे इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में बाबा गुरमुखदास सेवा समिति श्री झूलेलाल महिला सखी सेवा ग्रुप के सभी सदस्य का विशेष सहयोग रहा।


श्री विजय दुसेजा जी की खबर 

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