जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र चंद्राकर ने किया धरमी स्कूल का औचक निरीक्षण, आंगनबाड़ी केंद्र के पोषक आहार पैकेट में उत्पादन तिथि नहीं लिखे होने पर जताई नाराजगी
जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र चंद्राकर ने किया धरमी स्कूल का औचक निरीक्षण, आंगनबाड़ी केंद्र के पोषक आहार पैकेट में उत्पादन तिथि नहीं लिखे होने पर जताई नाराजगी
बालोद :- जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र चंद्राकर ने जनसंपर्क के दौरान गुरेदा संकुल के ग्राम धरमी के प्राथमिक विद्यालय का औचक निरीक्षण किया और स्कूली बच्चों से परिचय प्राप्त कर विभिन्न प्रश्नोत्तरी भी पूछे। इस दौरान उन्होंने स्कूल में उपस्थित एकमात्र शिक्षक से वहाँ पदस्थ तथा अनुपस्थित शिक्षकों के बारे में जानकारी ली तथा बिना वाजिब कारणों से शिक्षकों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने स्कूल भवन का बारीकी से निरीक्षण किया जिसमें पाया गया कि स्कूल भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है जिसमें पांचों कक्षाओं के विद्यार्थी एक ही कक्ष में बैठते हैं। अव्यवस्था का आलम यह है कि छतों के प्लास्टर भरभराकर गिर रहे हैं जिससे अनहोनी घटनाऐं घटने की आशंकाएं भी है। वहाँ संचालित मध्यान्ह भोजन के संबंध में भी उन्होंने स्कूल के शिक्षक से जानकारी ली जिसमें बताया गया कि अभी मध्यान्ह भोजन बच्चों को नहीं दिया जा रहा।
संस्था के शिक्षक ने बताया कि मरम्मत कार्य हेतु कई बार मांगपत्र दिया जा चुका है लेकिन अभी भी मरम्मत कार्य नहीं हो पाया। जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र चंद्राकर ने डीएमएफ की राशि के बंदरबांट का आरोप लगाते हुए कहा कि लगभग 10 करोड़ रुपए की राशि डीएमएफ की जारी हुई है उस राशि का सदुपयोग मरम्मत कार्य में किया जाना था लेकिन कई बार पत्र व्यवहार करने के बाद भी मरम्मत कार्य के लिए राशि जारी नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
एक ही कमरे में 5 कक्षाओं के बच्चे बैठ रहे हैं इसमें शिक्षा व्यवस्था कैसे दुरुस्त होगी, प्रदेश सरकार बातें तो बड़ी बड़ी करते हैं लेकिन धरातल पर दिखने वाला दृश्य विचलित करने वाला है।नौनिहाल बच्चों के प्रति प्रदेश सरकार गंभीर नहीं है। जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र चंद्राकर ने समीप के ही आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया और अव्यवस्थाओं को देखकर तत्काल महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों से चर्चा कर व्यवस्था दुरुस्त करने का आग्रह किया।
उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को प्रदान किए जाने वाले पूरक पोषण आहार के पैकेट में उत्पादन तिथि का उल्लेख नहीं होने पर नाराजगी जताई और कहा कि उत्पादन तिथि नहीं लिखे होने के कारण एक्सपायरी तिथि का पता नहीं चलता जिसके कारण जाने अनजाने में बच्चों को विषाक्त पोषण आहार दिया जा रहा है। यह विभाग की घोर लापरवाही को प्रदर्शित करती है जिसके लापरवाही का खामियाजा छोटे छोटे बच्चों को उठाना पड़ सकता है। यह स्थिति अत्यंत चिंतनीय है आने वाले समय में यदि व्यवस्था दुरुस्त नहीं की जाएगी तो जिला पंचायत के पटल पर इसे प्रमुखता से उठाया जाएगा जिससे नौनिहाल बच्चों की सेहत और भविष्य सुरक्षित रहे।