गुरु पूर्णिमा पर्व श्री पाटेश्वर धाम का इस वर्ष 47 वां वर्ष
पाटेश्वर धाम के संत श्री राम बालक दास जी का ऑनलाइन सत्संग उनके भक्त जनों के लिए प्रतिदिन उनके विभिन्न व्हाट्सएप ग्रुप में आयोजित किया जाता है जिसमें भक्त जनों की जिज्ञासाओं का समाधान संत श्री के द्वारा किया जाता है।
आज की सत्संग परिचर्चा में साकेत जायसवाल लोरमी ने जिज्ञासा रखी की गुरु पूर्णिमा की परंपरा पर प्रकाश डालें गुरुवर, बाबा जी ने बताया कि गुरु पूर्णिमा का पर्व कब से मनाया जा रहा है यह किसी को ज्ञात नहीं है, क्योंकि हमारे सनातन धर्म में आदी संस्कृति से ही गुरु परंपरा है, गुरु कौन है जो हमारे अंधकार को दूर करता हो हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है,गुरु और शिष्य का रिश्ता किसी स्वार्थ का रिश्ता नहीं है गुरु पर्व उन सभी आध्यात्मिक गुरुओ को समर्पित है,जो हमारा आध्यात्मिक व्यक्तित्व विकास करते हैं बिना किसी व्यय के हमारे मार्गदर्शन करते हैं, यह केवल भारत में ही नहीं विश्व के कई देशों में मनाया जाता है बौद्ध धर्म और जैन धर्म के लोग इसे उत्सव के रूप में मनाते हैं,आध्यात्मिक शिक्षकों, गुरुओ के लिए सम्मान और उनके लिए कृतज्ञता दिखाने के लिए यह पर्व मनाया जाता है यह चतुर्मास का प्रारंभ पर्व भी है जो कि देवी शक्ति गणेश जी शंकर जी और विष्णु जी की उपासना के साथ प्रारंभ हो जाता है इसीलिए सर्वप्रथम गुरु को सम्मान दिया जाता है उनको पूजा जाता है।
पुरषोत्तम अग्रवाल जी ने गुरु दीक्षा से संबंधित जिज्ञासा संत जी के समक्ष रखी बाबा जी ने बताया कि कई लोग कहते हैं कि जो लोग गुरु दीक्षा नहीं लेते तो शिवजी उनके हाथ का चढ़ाया हुआ जल स्वीकार नहीं करते सूर्यदेव अर्ध स्वीकार नहीं करते तो यह सब मिथक है हमारे वेद पुराणों में यह कहीं वर्णित नहीं है और जो भी साधारण मनुष्य पंच देव की पूजा करता है वहां सभी वह गुरु दीक्षा लिए बगैर भी कर सकता है परंतु अगर वह विधिवत गुरु दीक्षा लेता है तो वह उसके लिए सर्वोत्तम है,, क्योंकि गुरु बिना ज्ञान नहीं गुरु का हमारे जीवन में विशेष महत्व है माता-पिता के अलावा मनुष्य के जीवन को आकार देने में गुरु महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं,खासकर भारत की यह परंपरा रही है जिसमें गुरु ना केवल ज्ञान से हमें सुसज्जित करते हैं बल्कि हमारे जीवन को आकार देकर संस्कार से भी सुशोभित करते हैं, ज्ञान तो हमें कहीं से भी प्राप्त हो जाता है लेकिन जीवन मूल्य केवल गुरु ही हमें प्रदान कर सकते हैं, गुरुद्वारा दिया गया तारक मंत्र हमारे शक्ति को उजागर करने में हमारी सहायता करता है,कहां जाता है ना वक्त और गुरु दोनों ही हमें सिखाना चाहते हैं लेकिन दोनों में वक्त जो सिखाता है उसमें हम हार सकते हैं परंतु गुरु जो सिखाता है उसमें हमारी हार कभी नहीं होती हमारे धर्म शास्त्रों में गुरु को सर्वोपरि रखा गया है गुरु को पार ब्रह्म परमात्मा का स्वरूप माना गया है इसीलिए गुरु दीक्षा लेकर अपने जीवन को साकार बनाएं जिससे कि एक सही मार्गदर्शन में आपका जीवन चले एवं गुरु का आश्रय आप पर बना रहे और आप परमात्मा के नियमों को समझते हुए प्रकृति की महिमा को जाने गुरु दीक्षा से हम जीवन मूल्यों को तो जान ही पाएंगे साथ ही हम ज्ञान अर्जित कर के अपने जीवन को भी साकार कर सकते हैं अतः अपने जीवन में गुरु दीक्षा को महत्व देना चाहिए।
इस प्रकार आज का ऑनलाइन सत्संग बाबा जी की शुभ मधुर भजन के साथ संपन्न हुआ ।
जय सियाराम जय गौ माता जय गोपाल