*1 नवंबर: मध्यप्रदेश स्थापना दिवस*
*राज्य: मध्यप्रदेश (कर्मभूमि)*
(प्रादेशिक मध्यप्रदेश गीत: स्वर्णिम मध्यप्रदेश है!)
*शीर्षक: स्वर्णिम मध्यप्रदेश है!*
*मुखड़ा*
स्वर्णिम मध्यप्रदेश है, स्वर्णिम मध्यप्रदेश है।
जन-जन गाए यशगान,
भाग्यवान है यह राज्य, उज्ज्वल मध्यप्रदेश है।
अतुल्य भारत करे गुणगान, स्वर्णिम मध्यप्रदेश है।
मेरा भारत है महान, स्वर्णिम मध्यप्रदेश है।
स्वर्णिम मध्यप्रदेश है।
*अंतरा-1*
शान-ए-हिंदुस्तान मेरा, सौंदर्य हृदय-प्रदेश यह।
अखंड भारत में विशेष यह, स्वराज्य सर्वश्रेष्ठ है।
नवयुग का अनुपम सृजन, सर्वांगीण उत्थान यहाँ।
रोशन मध्यप्रदेश यह, तारीफ-ए-हिंदुस्तान है।
जन-जन गाए यशगान,
लोकप्रिय है यह राज्य, सुखद मध्यप्रदेश है।
अतुल्य भारत करे गुणगान, स्वर्णिम मध्यप्रदेश है।
मेरा भारत है महान, स्वर्णिम मध्यप्रदेश है।
स्वर्णिम मध्यप्रदेश है।
*अंतरा-2*
स्वास्थ्य-शिक्षा-संस्कार, समुदाय का अधिकार यह।
समृद्ध मध्य-भारत में, स्वच्छ-साक्षरता अभियान है।
अभूतपूर्व गणराज्य में, लोकतंत्र का सम्मान यहाँ।
निर्मल ग्राम-शहर में, सम्पन्न विकास उल्लास है।
जन-जन गाए यशगान,
प्रगतिशील है यह राज्य, मनोरम मध्यप्रदेश है।
अतुल्य भारत करे गुणगान, स्वर्णिम मध्यप्रदेश है।
मेरा भारत है महान, स्वर्णिम मध्यप्रदेश है।
स्वर्णिम मध्यप्रदेश है।
*अंतरा-3*
प्रथम सेवा ही जन सेवा, सुशासन का उपदेश यह।
सर्वधर्म सत्कार प्रथा-पर्व, आनंद का समागम है।
वैभवपूर्ण सकल वर्ग, भारतवर्ष में सब एक यहाँ।
सद्भाव-एकता-भाईचारा, शांति का संदेश है।
जन-जन गाए यशगान,
शांतिप्रिय है यह राज्य, कुशल मध्यप्रदेश है।
अतुल्य भारत करे गुणगान, स्वर्णिम मध्यप्रदेश है।
मेरा भारत है महान, स्वर्णिम मध्यप्रदेश है।
स्वर्णिम मध्यप्रदेश है।
*अंतरा-4*
राष्ट्र अपना स्वर्ण चिड़िया, हमारा योगदान यह।
जनहित में राष्ट्रप्रेम का, व्यापक प्रचार-प्रसार है।
क्षण-क्षण में सौगात, कीर्ति-राज्य का गुणगान यहाँ।
स्वतंत्र राज्य शिखर पर, हर्ष-बुलंद सरताज है।
जन-जन गाए यशगान,
सर्वदा निर्भय है यह राज्य, उत्कृष्ट मध्यप्रदेश है।
अतुल्य भारत करे गुणगान, स्वर्णिम मध्यप्रदेश है।
मेरा भारत है महान, स्वर्णिम मध्यप्रदेश है।
स्वर्णिम मध्यप्रदेश है।।
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रचयिता:
*डॉ. हरिदास बड़ोदे 'हरिप्रेम' मेहरा*
कवि एवं लेखक (मानद डॉक्टरेट)
आमला, जिला बैतूल (मध्यप्रदेश)
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*जय मध्यप्रदेश! जय भारत देश!*