*लोकतंत्र के स्वायत्त संस्थानों पर विपक्ष का हमला शर्मनाक - डॉ. प्रतीक उमरे*

*लोकतंत्र के स्वायत्त संस्थानों पर विपक्ष का हमला शर्मनाक - डॉ. प्रतीक उमरे*

*लोकतंत्र के स्वायत्त संस्थानों पर विपक्ष का हमला शर्मनाक - डॉ. प्रतीक उमरे*
*लोकतंत्र के स्वायत्त संस्थानों पर विपक्ष का हमला शर्मनाक - डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष द्वारा चलाए जा रहे दुष्प्रचार और विरोध प्रदर्शनों पर कड़ा प्रहार किया है।डॉ. प्रतीक उमरे ने विपक्ष की इस मुहिम को लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की एक गहरी और सुनियोजित साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि जब भी देश में चुनाव नजदीक आते हैं,कांग्रेस और उसका कथित इंडिया गठबंधन अपनी संभावित हार का ठीकरा फोड़ने के लिए पहले से ही बहाने तलाशने लगता है।ईवीएम पर रोना रोने के बाद अब वे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बना रहे हैं।यह सीधे तौर पर भारत के निष्पक्ष चुनाव तंत्र पर हमला है,जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।डॉ. प्रतीक उमरे ने विपक्ष के खोखले दावों की धज्जियां उड़ाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से निलंबित करने की विपक्ष समर्थित याचिकाओं को खारिज कर साफ कर दिया है कि यह पूरा हंगामा महज झूठे नैरेटिव पर आधारित है।अदालत के इस रुख ने विपक्ष के मुंह पर करारा तमाचा जड़ा है।जंतर-मंतर और अन्य जगहों पर चुनाव आयोग के खिलाफ किए जा रहे प्रदर्शनों में देश विरोधी और अलगाववादी मानसिकता वाले तत्वों जैसे शरजील इमाम और उमर खालिद के पोस्टरों का लहराया जाना बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है।विपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करते-करते इस हद तक गिर चुका है कि वह देश को तोड़ने की बात करने वाली ताकतों की गोद में जा बैठा है।चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही एसआईआर की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और संवैधानिक दायरे में है।यदि विपक्ष के पास कोई वास्तविक शिकायत है तो वे चुनाव आयोग के विशेष अभियान के तहत नाम जुड़वाने की प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं,न कि सड़कों पर अराजकता फैलाकर जनता को बंधक बना सकते हैं।डॉ. प्रतीक उमरे ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सीजेपी जैसी कथित राजनीतिक बैशाखियों के दम पर जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को आंदोलन करने की धमकी देने वाले तत्व देश की शांति और सुरक्षा को भंग करने का प्रयास कर रहे हैं।विपक्ष संसद में महाभियोग का फुसका पटाखा चलाकर पहले ही मुंह की खा चुका है।ज्ञानेश कुमार एक बेहद अनुभवी और ईमानदार पूर्व प्रशासनिक अधिकारी हैं,जिन्होंने अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावीकरण जैसे देशहित के ऐतिहासिक फैसलों में अपनी अहम भूमिका निभाई है।उनके नेतृत्व में चुनाव आयोग पूरी निष्पक्षता से काम कर रहा है।डॉ. प्रतीक उमरे ने मांग की है कि जांच एजेंसियां इन तथाकथित प्रदर्शनों के पीछे की फंडिंग और देश विरोधी ताकतों के कनेक्शन की गहन जांच करें।विपक्ष अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख देश को अराजकता की आग में झोंकने की कोशिश कर रहा है।

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