*अफसरशाही की लापरवाही से सरकार की किरकिरी,डॉ. प्रतीक उमरे ने की डीईओ को निलंबित करने की मांग*

*अफसरशाही की लापरवाही से सरकार की किरकिरी,डॉ. प्रतीक उमरे ने की डीईओ को निलंबित करने की मांग*

*अफसरशाही की लापरवाही से सरकार की किरकिरी,डॉ. प्रतीक उमरे ने की डीईओ को निलंबित करने की मांग*
*अफसरशाही की लापरवाही से सरकार की किरकिरी,डॉ. प्रतीक उमरे ने की डीईओ को निलंबित करने की मांग*
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दुर्ग आगमन पर आयोजित गरिमामय शासकीय कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के कुछ गैर-जिम्मेदार अधिकारियों की घोर लापरवाही के कारण स्कूली बच्चों को हुई परेशानी पर भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने कड़ा रुख अपनाया है।डॉ. प्रतीक उमरे ने इस पूरी बदइंतजामी के लिए जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ तत्काल निलंबन और विभागीय जांच शुरू करने की मांग मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से की है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बच्चों के भविष्य,शिक्षा और उनके स्वास्थ्य को लेकर अत्यंत संवेदनशील है।मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों का उद्देश्य सदैव जनकल्याण और विकास होता है।परंतु दुर्ग के विभागीय अधिकारियों विशेषकर जिला शिक्षा अधिकारी की अदूरदर्शिता, तानाशाही रवैये और घोर प्रशासनिक लापरवाही के कारण हमारे नौनिहालों को भीषण गर्मी में पानी और नाश्ते जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ा।यह कृत्य अक्षम्य है।डॉ. प्रतीक उमरे ने सवाल उठाया कि बिना किसी ठोस कार्ययोजना और औपचारिक लिखित आदेश के केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मौखिक निर्देश देकर हजारों बच्चों को कार्यक्रम स्थल पर क्यों बुलाया गया? क्या डीईओ ने बच्चों की सुरक्षा और भोजन-पानी की व्यवस्था की मॉनिटरिंग खुद की थी?कार्यक्रम में पहुंचे मासूम बच्चों को घंटों भूखा-प्यासा रखना बेहद संवेदनशील मामला है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि यदि इस अव्यवस्था के बीच भीषण गर्मी के कारण किसी बच्चे की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता?अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते।शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों की इस घोर लापरवाही ने न केवल सरकार की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया,बल्कि विपक्ष को भी मासूम बच्चों के नाम पर राजनीति चमकाने का मौका दे दिया।डॉ. प्रतीक उमरे ने मुख्यमंत्री से मांग किया है कि दुर्ग जिला शिक्षा अधिकारी को कर्तव्यों में लापरवाही बरतने और बच्चों के स्वास्थ्य को खतरे में डालने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए कि किस अधिकारी के स्तर पर भोजन और पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था में चूक हुई है ताकि दोषियों पर एफआईआर दर्ज की जा सके तथा भविष्य में किसी भी शासकीय कार्यक्रम में बच्चों को बुलाए जाने से पहले उनके लिए सुरक्षा,उत्तम भोजन,ठंडे पानी और मेडिकल टीम की उपलब्धता अनिवार्य रूप से लिखित में सुनिश्चित की जाए।डॉ. प्रतीक उमरे ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार 'सुशासन' के सिद्धांत पर काम करती है,जहां बच्चों और नागरिकों का सम्मान सर्वोपरि है।ऐसे में बच्चों को परेशान करने वाले किसी भी दोषी अधिकारी को कतई बख्शा नहीं जाएगा।

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