*दुर्ग जिला अस्पताल बना 'रेफरल सेंटर', इलाज के नाम पर गरीबों की जिंदगी से खिलवाड़ - डॉ. प्रतीक उमरे*

*दुर्ग जिला अस्पताल बना 'रेफरल सेंटर', इलाज के नाम पर गरीबों की जिंदगी से खिलवाड़ - डॉ. प्रतीक उमरे*

*दुर्ग जिला अस्पताल बना 'रेफरल सेंटर', इलाज के नाम पर गरीबों की जिंदगी से खिलवाड़ - डॉ. प्रतीक उमरे*
*दुर्ग जिला अस्पताल बना 'रेफरल सेंटर', इलाज के नाम पर गरीबों की जिंदगी से खिलवाड़ - डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने दुर्ग जिले की जीवनरेखा कहे जाने वाले मुख्य जिला अस्पताल की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया से तत्काल संज्ञान लेने की मांग किया है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि दुर्ग का जिला अस्पताल अब इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि मरीजों को रायपुर मेकाहारा या निजी अस्पतालों में धकेलने का 'रेफरल सेंटर' बनकर रह गया है। जिला अस्पताल की ओपीडी में हर दिन 1,600 से अधिक लाचार और गरीब ग्रामीण मरीज बड़ी उम्मीद लेकर आते हैं।लेकिन हकीकत यह है कि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों के स्वीकृत पदों में से आधे से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। कई डॉक्टर ड्यूटी से नदारद रहते हैं या लंबी छुट्टियों पर भेज दिए गए हैं। स्त्री रोग, शिशु रोग और मेडिसिन जैसे संवेदनशील विभागों में डॉक्टरों की कमी के कारण इलाज के अभाव में मरीज तड़पने को मजबूर हैं।यह प्रबंधन की घोर प्रशासनिक विफलता है।वेंटिलेटर और क्रिटिकल केयर की महंगी मशीनें होने के बावजूद तकनीकी स्टाफ और डॉक्टरों की कमी की वजह से वे कबाड़ हो रही हैं।छोटी-मोटी आपातकालीन स्थिति में भी डॉक्टरों द्वारा हाथ खड़े कर दिए जाते हैं और मरीजों को रायपुर मेकाहारा या महंगे निजी अस्पतालों के लिए रेफरल पर्ची थमा दी जाती है,जिससे रास्ते में ही मरीजों की जान पर बन आती है।शासकीय योजनाओं की जमीनी विफलता पर निशाना साधते हुए डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा की विभाग दावा करते हैं कि शासकीय अस्पतालों में दवाइयां मुफ्त हैं,जबकि काउंटर पर ब्लड प्रेशर,डायबिटीज और सामान्य एंटीबायोटिक्स जैसी जीवन रक्षक दवाइयां तक उपलब्ध नहीं हैं।गरीब मरीजों को मजबूरी में बाहर के प्राइवेट मेडिकल स्टोर से हजारों रुपये की दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।आखिर मुफ्त दवाओं का बजट किसकी जेब में जा रहा है? इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि जिला अस्पताल में रिक्त पदों पर वैकल्पिक व्यवस्था तथा जीवन रक्षक दवाओं की शत-प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

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