*स्वच्छता रैंकिंग का कागजी महल ढहा,जमीनी हकीकत में 'नरक निगम' बना दुर्ग - डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने नगर निगम प्रशासन की लचर सफाई व्यवस्था और जमीनी विफलता पर तीखा हमला बोला है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि नगर निगम द्वारा स्वच्छता रैंकिंग को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावे पूरी तरह से फर्जी और कागजी हैं,जबकि धरातल पर दुर्ग शहर गंदगी के ढेर पर बैठा हुआ है।निगम प्रशासन कागजी आंकड़ों की हेराफेरी कर पुरस्कार बटोरने की सियासत में व्यस्त है,जबकि शहर की आम जनता बजबजाती नालियों,कचरे के ढेरों और दूषित पानी से त्रस्त है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि नगर निगम प्रशासन द्वारा डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन शत-प्रतिशत घरों से नियमित गीला और सूखा कचरा अलग-अलग उठाने का दावा किया जाता है जबकि सच्चाई यह है कि पटरी पार क्षेत्र सहित दर्जनों वार्डों में हफ्तों तक गाड़ियां नहीं पहुंचतीं।कचरा संग्रहण के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है।नगर निगम प्रशासन द्वारा नाली सफाई व जल निकासी मानसून पूर्व और नियमित नालियों की सफाई का दावा किया गया था जिससे जलभराव न हो।जबकि शहर की अंदरूनी नालियां सिल्ट (कीचड़) और प्लास्टिक से पटी पड़ी हैं।हल्की बारिश में भी सड़कें तालाब बन जाती हैं।नगर निगम प्रशासन द्वारा सार्वजनिक और धार्मिक स्थल प्रमुख पर्यटन व आस्था केंद्रों पर विशेष स्वच्छता और देखरेख का दावा किया जाता है जबकि सच्चाई यह है कि शिवनाथ नदी के घाटों पर कचरे और मूर्तियों के अवशेषों का अंबार लगा हुआ है। पानी दूषित हो रहा है और वहां से दुर्गंध आ रही है। नगर निगम प्रशासन द्वारा कचरा डंपिंग यार्ड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और ट्रेंचिंग ग्राउंड में कचरे के वैज्ञानिक निपटान का दावा किया जाता है जबकि सच्चाई यह है कि घनी आबादी वाले इलाकों के पास अवैध रूप से कचरा डंप किया जा रहा है, जिससे आसपास की बस्तियों में महामारी फैलने का खतरा मंडरा रहा है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि दुर्ग की जनता अब समझ चुकी है कि नगर निगम प्रशासन को जनहित से कोई सरोकार नहीं है।स्वच्छ सर्वेक्षण की रैंकिंग चमकाने के लिए लाखों रुपये की कंसल्टेंसी फीस और प्रचार-प्रसार में फूंक दिए जाते हैं,लेकिन सफ़ाई कर्मचारियों की सुरक्षा,पर्याप्त उपकरणों और जमीनी मॉनिटरिंग के नाम पर सिर्फ ढिंढोरा पीटा जाता है।करोड़ों रुपये के टेंडर होने के बाद भी शहर की जनता नरकीय जीवन जीने को मजबूर है।वार्ड स्तर पर जनता की शिकायतों को सुनने वाला कोई नहीं है।जब प्रमुख आस्था के केंद्र शिवनाथ नदी के घाटों तक को प्रशासन साफ नहीं रख पा रहा है, तो आम मोहल्लों की स्थिति की कल्पना आसानी से की जा सकती है।