ममता का महासंगम: जब दो माताओं के अलौकिक मिलन से भीग उठी हर आँख
दुर्गा पूजा उत्सव में दिखा भक्ति का अनोखा रंग: दो भव्य दुर्गा समिति श्री गंजपारा दुर्गा उत्सव समिति एवं श्री सत्तीचौरा मां दुर्गा मंदिर समिति, दुर्ग की दोनों माताओं का हुआ अद्भुत और अलौकिक मिलन
शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर आज शहर में आस्था, श्रद्धा और प्रेम का एक ऐसा अद्भुत और अलौकिक नजारा देखने को मिला, जिसने श्रद्धालुओं की आँखों को नम और दिलों को भक्ति से सराबोर कर दिया क्षेत्र की दो सबसे प्रतिष्ठित श्री गंजपारा दुर्गा उत्सव समिति एवं श्री सत्तीचौरा मां दुर्गा मंदिर समिति, दुर्ग की 'माताओं' का भव्य मिलन संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक और भावुक पल के साक्षी सैकड़ों भक्त बने। यह दोनों माताओं का मिलन की परंपरा विगत 49 वर्षों से जारी है
गंजपारा के पुराने लोगों के माने तो यह पहले गंजमंडी में स्थापित होने वाली माता की प्रतिमा के साथ विराजमान होती थीं। दोनों को बहनों की तरह माना जाता है। बाद में अलग से समिति का गठन हुआ। आज भी प्रतिमा की स्थापना के दौरान दोनों प्रतिमाओं को आमने-सामने से होकर एक बार अवश्य गुजारा जाता है। फिर उसके बाद पंडाल में विराजमान किया जाता दोनों समिति के बुजुर्ग बताते है कि जब तक यह दोनों बहन एक दूसरे को देख नही लेते तब तक वे पण्डाल में विराजमान नही होते जिसका कई बार प्रत्यक्ष प्रमाण भी मिला है जो माता को 10 लोग गाड़ी में चढ़ा और उतार देते है और अगर ये बहने एक दूसरे को नही देखते है तो उसी माताओं को 100 लोग मिलकर भी गाड़ी से उतार चढा नही सकते, यह प्रमाणित हुआ है
भक्तिमय माहौल में हुआ भव्य स्वागत शंखध्वनि, ढोल-नगाड़ों की थाप और 'जय माता दी' के गगनभेदी जयकारों के बीच जब दोनों समितियों का कारवां शनिचरी बाजार चौक पर आमने-सामने पहुंचा, तो पूरा माहौल अलौकिक ऊर्जा से भर गया। दोनों ओर से पुष्पवर्षा की गई और जिले के विद्वान आचार्यों के द्वारा गंगा आरती स्वरूप दोनों माताओं की महाआरती उतारी गई। जिसमें अंबे तू है जगदम्बे काली वाली आरती म्यूजिक एवं संगीत के साथ की गई, इस मिलन को देखने के लिए सड़क के दोनों ओर श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा।
आस्था और सौहार्द की अनूठी मिसाल
दोनों समितियों के मनोज शर्मा एवं विकाश पुरोहित ने बताया कि यह केवल दो समितियों का मिलन नहीं, बल्कि दो क्षेत्रों की साझा संस्कृति, आपसी सौहार्द और अटूट आस्था का प्रतीक है।
इस अवसर पर समिति के सदस्यों ने कहा, "आज का यह मिलन साक्षात मां भगवती की इच्छा से ही संभव हो पाया है। यह दृश्य इतना दिव्य था कि मानो साक्षात देवलोक धरती पर उतर आया हो। हम इस परंपरा को आगे भी इसी तरह प्रेम और सद्भावना के साथ निभाते रहेंगे।"
यहाँ वात्सल्य, प्रेम और करुणा का एक ऐसा दुर्लभ दृश्य देखने को मिला, जिसने वहाँ मौजूद हर हृदय को झकझोर दिया। इस भावुक कर देने वाले पल को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो ब्रह्मांड की सारी ममता एक जगह सिमट आई हो। यह मिलन वात्सल्य की उस पराकाष्ठा का प्रतीक है, जहाँ शब्द छोटे पड़ जाते हैं और केवल भावनाएं बोलती हैं।
इस अलौकिक और पवित्र दृश्य को शब्दों में पिरोती एक विशेष शायरी:
"ममता की मूरत से जब ममता का मिलन होता है,
धरती तो क्या, उस पल अंबर भी मगन होता है।
दुआएं खुद-ब-खुद हाथों से बरसने लगती हैं,
जब दो माताओं का यह अलौकिक संगम होता है।"
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने इस क्षण को अपने जीवन का सबसे भावुक और यादगार पल बताया।
यह ऐतिहासिक और भावनात्मक मिलन न केवल उपस्थित लोगों की स्मृतियों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया, बल्कि इसने समाज को यह संदेश भी दिया कि माँ का स्वरूप हमेशा वंदनीय और सर्वोपरि है।
इस कार्यक्रम में विशेष रूप से अरुण वोरा राजेन्द्र साहू धीरज बाकलीवाल चतुर्भुज राठी अशोक राठी अजय शर्मा गौतम जैन गोपाल शर्मा नवल अग्रवाल महेश टावरी शैलेश तिवारी रवि पीडियार राजेश शर्मा सुरेश गुप्ता नरेंद्र गुप्ता को घनश्याम पंड्या नरेंद्र शर्मा विजय जैन गुड्डू कश्यप डब्बू चंद्रवंशी अमित यादव मनीष दुबे राहुल शर्मा मनोज गुप्ता ललित शर्मा राजू पुरोहित सतबीर शर्मा विवेक मिश्रा विकेश मिश्रा राहुल दुबे निर्मल शर्मा लक्की अग्रवाल ओमप्रकाश टावरी ईशान शर्मा अर्जित शुक्ला मनोज गुप्ता लाला विनय मिश्रा ऋषि गुप्ता मोहित पुरोहित हर्षद पारख सोंटी गुप्ता कृतज्ञ शर्मा सोनल सेन आशीष मेश्राम प्रकाश कश्यप प्रवीण अग्रवाल चेतना जैन अनमोल पांडेय के साथ सैकड़ों धर्म प्रेमी समित्ति के सदस्य उपस्थित थे..