*सरकारी कार्यालय जनता की सेवा के लिए हैं,न कि आम नागरिकों को परेशान करने: डॉ. प्रतीक उमरे*

*सरकारी कार्यालय जनता की सेवा के लिए हैं,न कि आम नागरिकों को परेशान करने: डॉ. प्रतीक उमरे*

*सरकारी कार्यालय जनता की सेवा के लिए हैं,न कि आम नागरिकों को परेशान करने: डॉ. प्रतीक उमरे*
*सरकारी कार्यालय जनता की सेवा के लिए हैं,न कि आम नागरिकों को परेशान करने: डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग में आम जनता से जुड़े शासकीय कामकाज में पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन को लेकर दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने कड़ा रुख अपनाया है।उन्होंने कहा कि दुर्ग में भ्रष्ट अधिकारियों के लिए कोई जगह नहीं है या तो अपनी कार्यप्रणाली सुधार लें,या फिर कार्रवाई के लिए तैयार रहें।सरकारी कार्यालय जनता की सेवा के लिए हैं,न कि आम नागरिकों को परेशान करने अथवा किसी भी प्रकार की अवैध वसूली का माध्यम बनने के लिए।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि जो अधिकारी ईमानदारी,नियम और जनसेवा की भावना से काम कर रहे हैं,उनका सम्मान होना चाहिए,लेकिन जिन अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार,रिश्वतखोरी, लापरवाही या पद के दुरुपयोग की प्रथमदृष्टया शिकायतें हैं,उनके मामलों की निष्पक्ष जांच कर दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।उन्होंने इस विषय पर छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकासशील को संज्ञान लेने की मांग किया है।उन्होंने कहा कि जनता को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ें,फाइलें अनावश्यक रूप से रोकी जाएं या किसी काम के लिए अवैध लेन-देन की शिकायतें सामने आएं,तो यह सुशासन की भावना के बिल्कुल विपरीत है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि सरकारी पद किसी अधिकारी को जनता पर अधिकार जमाने का लाइसेंस नहीं देता।अधिकारी-कर्मचारी संविधान,कानून और शासन के प्रति जवाबदेह हैं।आम नागरिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार और समय-सीमा में काम करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।शासकीय कार्यालय जनता की सेवा के लिए हैं,लेकिन यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा रिश्वतखोरी,काम के बदले अवैध वसूली,फाइल रोकने या पद के दुरुपयोग की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई किया जाना आवश्यक है।

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