ज्ञान गंगा पब्लिक स्कूल, कुरदी , गुण्डरदेही में पहले वृक्षाबंधन फिर रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित किया गया
ज्ञान गंगा पब्लिक स्कूल, कुरदी , गुण्डरदेही में पहले वृक्षाबंधन फिर रक्षाबंधन कार्यक्रम आयोजित किया गया :-
पर्यावरण संरक्षण गतिविधि ठीम, जिला बालोद द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भारत के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से पहले वृक्षाबंधन फिर रक्षाबंधन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि श्रीमान नारायण साहू ( प्रधानपाठक) ,विशेष अतिथि श्रीमती रुखमणी ,विनोद कुमार साहू,अध्यक्षता संजय साहू पर्यावरण गतिविधि जिला सह संयोजक व प्रशिक्षक कमलकृष्णाकांत साहू पर्यावरण गतिविधि जिला संयोजक, ने प्रशिक्षण दिया इस कार्याशाला में सभी समस्त शिक्षक सविता जलालकर,मोहन विश्वकर्मा,वैष्णवी साहू,ज्योति साहू,ललिता साहू,मानिया जलबांकर,किरण साहू,हेमलता विश्वकर्मा,सावित्री ठाकुर सहयोग प्राप्त हुआ भैया बहनों ने हाथों से वृक्ष के लिए रक्षा सूत्र (राखी) निर्माण किया था विद्यालय के भैया बहन भागीदारी दिखाया ।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 9 :30 बजे हुआ इस कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता के चलचित्र पर पुष्प अर्पित कर हुआ कार्याशाला के मुख्य अतिथि श्री नारायण साहू ( प्रधानपाठक) जी ने कहां रक्षा बंधन भाई-बहन के पवित्र प्रेम, स्नेह और एक-दूसरे की रक्षा के संकल्प का प्रतीक त्योहार है,यह त्योहार हर साल सावन (श्रावण) महीने की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, 'रक्षा बंधन' शब्द का अर्थ है सुरक्षा का धागा। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी या रक्षासूत्र बांधती हैं,बहनें भाई के मस्तक पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, भाई इसके बदले अपनी बहन को उपहार देते हैं और जीवनभर हर परिस्थिति में उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं,पौराणिक कथाएँ हैं महाभारत काल में जब श्री कृष्ण की उंगली से खून बह रहा था, तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनकी उंगली पर बांधा था।
इसके बदले कृष्ण ने चीर हरण के समय उनकी लाज बचाकर भाई का फर्ज निभाया था। भगवान विष्णु द्वारा पाताल लोक में पहरा देने जाने पर, माता लक्ष्मी ने राजा बलि को राखी बांधकर भगवान विष्णु को वापस माँगा था। यमुना द्वारा कलाई पर रक्षासूत्र बांधने से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें अमरता का वरदान दिया था। वृक्ष को रक्षासूत्र (राखी) बांधना प्रकृति के प्रति आभार और उसकी रक्षा का संकल्प लेने का एक बेहद सुंदर तरीका है । विशेष अतिथि श्रीमती रुखमणी हमें वृक्षों (पेड़ों) को रक्षाबंधन पर राखी इसलिए बाँधनी चाहिए क्योंकि वे हमारे जीवन के सच्चे रक्षक हैं और हमें ऑक्सीजन, छाया, फल और जीवन देते हैं,जैसे भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है, वैसे ही हमें भी पेड़ों को बचाने और नए पौधे लगाने का संकल्प लेना चाहिए, यदि पेड़ बचेंगे, तभी पृथ्वी पर जीवन और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रहेगा ,वृक्षों को
राखी बाँधना प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और हमारे प्राचीन संस्कारों का हिस्सा है। अध्यक्षता संजय साहू पर्यावरण गतिविधि जिला सह संयोजक ने कहां रक्षाबंधन के साथ-साथ वृक्ष में भी रक्षा सूत्र बांधना आवश्यक है पर्यावरण संरक्षण प्रमुख रूप से किस प्रकार कर सकते हैं सीडबॉल निर्माण व बीजरोपण ,वृक्षारोपण, जल-स्रोतों का संरक्षण, वर्षा जल-संग्रह और जल का संयमित उपयोग,प्लास्टिक और प्रदूषणकारी पदार्थों का न्यूनतम प्रयोग,शिक्षा और सामाजिक चेतना के माध्यम से पर्यावरणीय संस्कार, एक अत्यंत प्रभावशाली और दूरदर्शी विचार है। एक सामूहिक जन-आंदोलन बनकर ही सफल हो सकता है।जब सामाजिक कार्यकर्ता, परिवार और समुदाय साथ आते हैं, तो इसके सकारात्मक प्रभाव प्रगट होता है सीडबॉल बनाना एक आसान प्रक्रिया है जब परिवार मिलकर एक 'स्मृति वृक्ष' या 'पारिवारिक वाटिका' तैयार करते हैं, तो उससे भावात्मक जुड़ाव पैदा होता है, हम परिवार के साथ बैठकर भी कर सकते है जिस प्रकार पिता जी ने 10 सीडबॉल ,माता जी 10 इस प्रकार से दादी दादा भी कर सकते है यहां सभी का जिम्मेदारी है । वृक्षारोपण इसलिए आवश्यक है क्योंकि पेड़ हमें जीवनदायिनी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, हवा से हानिकारक गैसों और धूल को सोखकर पर्यावरण को शुद्ध करते हैं, मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में मदद करते हैं मानव जीवन के लिए मूल आधार वृक्षारोपण वन कार्बन-डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं
और जल चक्र को बनाए रखकर मौसम और तापमान को नियंत्रित करते हैं हरे-भरे पेड़ों के बीच रहने से तनाव कम होता है और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है। कार्यक्रम के अंत कमलकृष्णाकांत साहू द्वारा 'नेशनल स्टूडेंट पर्यावरण प्रतियोगिता' (National Student Paryavaran Competition - 2026 NSPC) के बारे में जानकारी दिया गया यह छात्रों के लिए एक पर्यावरण-आधारित प्रतियोगिता है इसे भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और शिक्षा मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है यह प्रतियोगिता 15 जुलाई से शुरू हो चूका है जो 15 अगस्त तक चलेगी पंजीकरण (Registration): भाग लेने के लिए आप पोस्टर में दिए गए QR कोड को स्कैन कर सकते हैं या उनकी आधिकारिक वेबसाइट paryavaransanrakshan.org पर जा सकते हैं कार्यक्रम में पर्यावरण गतिविधि के कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों एवं स्थानीय नागरिकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई और अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी सुरक्षा का संकल्प लिया।