रिपोर्टर रोहित वर्मा
लोकेशन खरोरा
*शिक्षक दिवस पर विशेष: सेवानिवृत्ति के बाद भी शिक्षा की अलख जगा रहे सुनील कुमार नायक**
*40 वर्षों के शैक्षिक अनुभव को बच्चों के लिए कर रहे समर्पित, निःशुल्क स्कूलों में दे रहे शैक्षिक योगदान*
खरोरा।
शिक्षक का दायित्व केवल नौकरी तक सीमित नहीं होता, बल्कि समाज और विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा देने की भावना से जुड़ा होता है। इसी सोच को चरितार्थ कर रहे हैं राज्य शिक्षक सम्मान से सम्मानित सेवानिवृत्त व्याख्याता सुनील कुमार नायक। वर्ष 2025 में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मठपुरैना, रायपुर से सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं और समय निकालकर विभिन्न शासकीय स्कूलों में निःशुल्क शैक्षिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।
श्री नायक रायपुर जिले के विभिन्न विद्यालयों में पहुंचकर विद्यार्थियों को कैरियर गाइडेंस, शिक्षण कार्य एवं विभिन्न शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। उनका उद्देश्य है कि चार दशक से अधिक समय के अपने शैक्षिक अनुभव का लाभ अधिक से अधिक बच्चों तक पहुंचाया जा सके और उनकी समझ एवं सीखने की क्षमता का विकास हो।
सुनील कुमार नायक ने अपने शिक्षकीय जीवन की शुरुआत वर्ष 1986 में की थी। लगभग 40 वर्षों की शैक्षिक यात्रा के दौरान उन्होंने शाला त्यागने वाले तथा विद्यालय में अनियमित रूप से आने वाले विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए। जरूरतमंद बच्चों की मदद के साथ-साथ उन्होंने शिक्षण को रोचक और प्रभावी बनाने के लिए खेल-खेल में शिक्षा, सहायक शिक्षक सामग्री, चित्र, चार्ट एवं प्रत्यक्ष प्रदर्शन जैसी विधियों का व्यापक उपयोग किया।
उनकी शिक्षण पद्धति में विद्यार्थियों के पूर्व ज्ञान से नई जानकारी को जोड़ना और उन्हें सक्रिय रूप से शैक्षिक गतिविधियों से जोड़ना प्रमुख रहा। इससे विद्यार्थियों में विषय को समझने और सीखने के प्रति रुचि विकसित हुई। शिक्षा के क्षेत्र में उनके इन विशिष्ट योगदानों को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2022 में राज्य शिक्षक सम्मान पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
श्री नायक रायपुर डाइट में मास्टर ट्रेनर के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से उन्हें सिंगापुर में SCPTA द्वारा आयोजित “Enhancing Pedagogy Skill” प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण के दौरान अर्जित अनुभवों को भी वे अपने शिक्षण कार्य में उपयोग करते रहे हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका जुड़ाव केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। वे शैक्षिक एवं सामाजिक कार्य, सांस्कृतिक उत्थान, अंधविश्वास के प्रति जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों से भी जुड़े हुए हैं।
अपने सेवा कार्यों के बारे में श्री नायक कहते हैं, “सेवानिवृत्ति के बाद जब भी समय मिलता है, मैं शासकीय स्कूलों में निःशुल्क शैक्षिक गतिविधियां करता हूं। गीतों, खेलों और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने का प्रयास करता हूं। आसपास के पर्यावरण और दैनिक जीवन की वस्तुओं के उदाहरण देकर विषय-वस्तु को समझाने की कोशिश करता हूं, जिससे बच्चों की समझ का विकास हो।”
वे आगे कहते हैं कि बच्चों के साथ शैक्षिक कार्य करने से उन्हें आत्मसंतुष्टि मिलती है। उनका कहना है कि उनके पास जो भी शैक्षिक अनुभव है, उसे वे समाज और बच्चों के लिए समर्पित करना चाहते हैं।
शिक्षक दिवस के अवसर पर सुनील कुमार नायक का यह प्रयास इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि एक सच्चे शिक्षक की भूमिका सेवानिवृत्ति के साथ समाप्त नहीं होती, बल्कि उसका ज्ञान और अनुभव समाज के लिए जीवनभर उपयोगी बना रह सकता है।