*यूपीआई पर सीमित एमडीआर को केवल अतिरिक्त बोझ बताना उचित नहीं — डॉ. प्रतीक उमरे*

*यूपीआई पर सीमित एमडीआर को केवल अतिरिक्त बोझ बताना उचित नहीं — डॉ. प्रतीक उमरे*

*यूपीआई पर सीमित एमडीआर को केवल अतिरिक्त बोझ बताना उचित नहीं — डॉ. प्रतीक उमरे*
*यूपीआई पर सीमित एमडीआर को केवल अतिरिक्त बोझ बताना उचित नहीं — डॉ. प्रतीक उमरे*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ प्रतीक उमरे ने यूपीआई भुगतान पर एमडीआर को लेकर व्यापारिक संगठनों की चिंताओं पर कहा है कि छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखना भी आवश्यक है।इसलिए यूपीआई पर लागू की गई वर्तमान एमडीआर व्यवस्था को केवल "डिजिटल भुगतान महंगा करने" के रूप में देखना उचित नहीं होगा।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि एमडीआर ग्राहक से वसूला जाने वाला कोई सरकारी टैक्स नहीं है,बल्कि भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंक,भुगतान सेवा प्रदाता और ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित होने वाला शुल्क है।इसका उद्देश्य यूपीआई के संचालन,तकनीकी ढांचे,साइबर सुरक्षा,फ्रॉड प्रिवेंशन तथा भविष्य के विस्तार की लागत को पूरा करने में योगदान देना है।केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि एमडीआर की राशि सरकार या एनपीसीआई द्वारा टैक्स के रूप में नहीं ली जाती। डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि लगभग 96 प्रतिशत पर्सन टू मर्चेंट लेनदेन एमडीआर से प्रभावित नहीं होंगे।इसलिए छोटे दुकानदार, ठेला-व्यवसायी, स्थानीय किराना दुकानदार और सामान्य उपभोक्ताओं पर व्यापक रूप से अतिरिक्त बोझ पड़ने की धारणा वर्तमान व्यवस्था के पूरे तथ्यों को सामने नहीं रखती।केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों के लिए यूपीआई भुगतान निःशुल्क रहेगा तथा बैंकों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि व्यापारी एमडीआर को ग्राहक पर न डालें। यूपीआई ऐप प्रदाताओं को भी अतिरिक्त प्लेटफॉर्म या छिपे हुए शुल्क लगाने की अनुमति नहीं है।उन्होंने कहा कि व्यापारी के लिए भुगतान स्वीकार करना सस्ता और ग्राहक के लिए भुगतान करना आसान रखना जितना जरूरी है,उतना ही जरूरी भुगतान व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ रखना भी है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि यह कहना कि एमडीआर लागू होने से अनिवार्य रूप से नकद लेनदेन तेजी से बढ़ जाएगा,एक अनुमान है,इसे प्रमाणित करने के लिए लेनदेन के वास्तविक आंकड़ों का अध्ययन आवश्यक है।यूपीआई की उपयोगिता केवल शुल्क की अनुपस्थिति से नहीं,बल्कि उसकी सुविधा,गति, इंटरऑपरेबिलिटी और व्यापक स्वीकार्यता से भी जुड़ी है।

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