भिलाई स्टील सिटी में महाराष्ट्रीयन परिवारों ने निभाई महालक्ष्मी गौरी पूजन की परंपरा
भिलाई। भिलाई स्टील सिटी में महाराष्ट्रीयन परिवारों द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही महालक्ष्मी गौरी पूजन की परंपरा इस वर्ष भी श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ निभाई गई। अष्टमी तिथि पर महाराष्ट्रीयन परंपरा के अनुसार घर-घर मां महालक्ष्मी गौरा-गौरी की प्रतिमाएं स्थापित कर विधिवत पूजा-अर्चना की गई।
इस अवसर पर धन, समृद्धि, सुख-शांति और परिवार की उन्नति के लिए मां महालक्ष्मी से प्रार्थना की गई। भिलाई के विभिन्न सेक्टरों में महाराष्ट्रीयन परिवारों द्वारा यह पर्व श्रद्धाभाव से मनाया गया।
महालक्ष्मी का स्वागत परिवार में बेटी की तरह किया जाता है। इस अवसर पर घरों को फूलों और रंगोलियों से सजाया गया। तीन दिवसीय उत्सव के पहले दिन महालक्ष्मी का आगमन एवं स्थापना, दूसरे दिन विधिवत पूजा-अर्चना और पारंपरिक भोजन-प्रसाद का आयोजन किया गया, जबकि तीसरे दिन मां महालक्ष्मी का विसर्जन किया गया।
पर्व के दौरान महालक्ष्मी को छप्पन भोग अर्पित किया गया। इसमें 16 प्रकार की सब्जियां, ज्वार के आटे की आंबील और पूरन पोली विशेष प्रसाद के रूप में शामिल रहे। इसके अलावा पारंपरिक व्यंजन जैसे भुजिया, कांदा-चटणी, मिठाई आदि भी तैयार किए गए।
आयोजक प्रशांत कुमार क्षीरसागर ने बताया कि महाराष्ट्रीयन परिवारों में यह पर्व धार्मिक आस्था और पारंपरिक संस्कृति से जुड़ा हुआ है। मां महालक्ष्मी से धन-समृद्धि के साथ परिवार में सुख-शांति और उन्नति की कामना की जाती है।
उषा प्रशांत क्षीरसागर ने बताया कि महालक्ष्मी पूजन के दौरान विशेष रूप से छप्पन भोग और पारंपरिक व्यंजनों का प्रसाद अर्पित किया जाता है। महिलाओं द्वारा घर-घर मां महालक्ष्मी की स्थापना कर दर्शन एवं पूजा-अर्चना की गई।
इस अवसर पर एस. मानेकर परिवार, उषा प्रशांत क्षीरसागर, योजना डी. हाके, रुद्र एवं पियुष क्षीरसागर सहित महालक्ष्मी भक्तजन उपस्थित रहे। पूजा एवं आरती के पश्चात महाप्रसाद का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने “श्री महालक्ष्मी माता की जय” के जयकारे लगाए।