*स्वामी आत्मानंद स्कूल खलारी में हर्षोल्लास से मनाया गया संस्कृत दिवस : प्राचार्य ने कहा - संस्कृत सभी भाषाओं की जननी*

*स्वामी आत्मानंद स्कूल खलारी में हर्षोल्लास से मनाया गया संस्कृत दिवस : प्राचार्य ने कहा - संस्कृत सभी भाषाओं की जननी*

*स्वामी आत्मानंद स्कूल खलारी में हर्षोल्लास से मनाया गया संस्कृत दिवस : प्राचार्य ने कहा - संस्कृत सभी भाषाओं की जननी*
*स्वामी आत्मानंद स्कूल खलारी में हर्षोल्लास से मनाया गया संस्कृत दिवस : प्राचार्य ने कहा - संस्कृत सभी भाषाओं की जननी*

*संस्कृत केवल भाषा नहीं, हमारी संस्कृति और संस्कारों की आत्मा है - व्याख्याता एस. उर्वशा*

 स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय खलारी में 31 अगस्त को संस्कृत दिवस बड़े ही हर्षोल्लास और गरिमामय वातावरण में मनाया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के प्राचार्य एस. जॉनसन ने की। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में संस्कृत भाषा के प्रति अभिरुचि पैदा करना है। उन्होंने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है और भारत की सबसे प्राचीन भाषा है। यह केवल भाषा नहीं, बल्कि हमारे ज्ञान-विज्ञान का अक्षय भंडार है। ऋषि-मुनियों ने समस्त प्राचीन ग्रंथों, चारों वेदों, पुराणों, रामायण और महाभारत जैसे सभी पौराणिक ग्रंथों की रचना संस्कृत भाषा में ही की थी। पूर्व काल में हमारे देश में आम बोलचाल की भाषा भी संस्कृत ही थी।

*छात्राओं ने दी मनमोहक प्रस्तुति*

कार्यक्रम का शुभारंभ कक्षा 10वीं की छात्रा कल्पना एवं जीर्पिया द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत और सरस्वती वंदना से हुआ। उनकी सुमधुर प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया।

*संस्कृत आज भी है प्रासंगिक*
कार्यक्रम में संस्कृत व्याख्याता एस. उर्वशा ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा आज के आधुनिक युग में भी अत्यंत उपयोगी है। संस्कृत भाषा ही हमारी संस्कृति की रक्षा करती है। उन्होंने कहा कि संस्कृत विश्व की सबसे वैज्ञानिक भाषा है। कंप्यूटर के लिए सबसे उपयुक्त भाषा के रूप में भी संस्कृत को माना गया है।

उन्होंने बताया कि संस्कृत को "देवभाषा" भी कहा जाता है। 21 जून की तरह ही श्रावण पूर्णिमा के दिन संस्कृत दिवस मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत 1969 में हुई थी। भारत ही नहीं, बल्कि जर्मनी में 14 विश्वविद्यालयों में संस्कृत पढ़ाई जाती है और नासा के वैज्ञानिकों ने भी माना है कि संस्कृत में शब्दों का खजाना है जो अंतरिक्ष विज्ञान के लिए उपयोगी है।

कार्यक्रम का कुशल संचालन संस्कृत व्याख्याता संजय कुमार खरे ने किया।

इस अवसर पर भूमिका पाटिल , जी.एस. कोर्राम, बी.आर. रावटे, पी.के. शुक्ला, बी. खोब्रागढ़े, एस. यादव, चंद्राकर, जे.के. अमरिया, धर्मेन्द्र , श्रवण, विकास साहू, धर्मेन्द्र चतुर्वेदी, यामिनी साहू सहित समस्त शिक्षक गण, कर्मचारीगण एवं विद्यालय के समस्त छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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