*कागजों में साफ दुर्ग,जमीन पर गंदगी और जलजमाव!निगम प्रशासन के दावों पर भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे का हमला*

*कागजों में साफ दुर्ग,जमीन पर गंदगी और जलजमाव!निगम प्रशासन के दावों पर भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे का हमला*

*कागजों में साफ दुर्ग,जमीन पर गंदगी और जलजमाव!निगम प्रशासन के दावों पर भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे का हमला*
*कागजों में साफ दुर्ग,जमीन पर गंदगी और जलजमाव!निगम प्रशासन के दावों पर भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे का हमला*
दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने शहर में कुछ घंटों की बारिश के बाद उत्पन्न जलजमाव,गंदगी और बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर नगर निगम प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।उन्होंने कहा कि थोड़ी देर की बारिश ने ही नगर निगम की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था के दावों की पोल खोल दी है। शहर के अनेक हिस्सों में सड़कें कीचड़ और गंदगी से पट गईं, नालियां उफान पर आ गईं तथा कई स्थानों पर बारिश का पानी सड़कों और गलियों में जमा हो गया।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि नगर निगम द्वारा हर वर्ष बरसात से पहले नालियों की सफाई और जलनिकासी की समुचित व्यवस्था करने के दावे किए जाते हैं,लेकिन बारिश में इन दावों की वास्तविकता सामने आ जाती है।यदि नालियों की नियमित और सही तरीके से सफाई होती तथा निकासी मार्ग दुरुस्त होते तो कुछ घंटों की बारिश में ही शहर की ऐसी स्थिति नहीं बनती।उन्होंने कहा कि नालियों में कचरा, गाद और प्लास्टिक जमा होने के कारण बारिश का पानी तेजी से आगे नहीं बढ़ पाता। कई पुरानी नालियां जर्जर हैं, अनेक स्थानों पर टूट-फूट चुकी हैं और कुछ जगह नालियों पर अतिक्रमण अथवा अव्यवस्थित निर्माण के कारण पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है।इसका सीधा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि नाली सफाई के नाम पर कई स्थानों पर केवल औपचारिकता पूरी की जाती है।यदि सफाई के बाद भी नालियां बारिश के समय कचरे और गाद से भरी नजर आती हैं तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि सफाई कार्य वास्तव में कितनी गंभीरता से और कितने प्रभावी ढंग से किया गया।उन्होंने कहा कि नगर निगम को केवल कागजों और बैठकों में सफाई व्यवस्था बेहतर दिखाने के बजाय मैदानी स्तर पर काम दिखाई देना चाहिए।वार्डों में नियमित निरीक्षण,नालियों की वास्तविक सफाई, निकाले गए कचरे का तत्काल परिवहन तथा जलनिकासी के संवेदनशील स्थानों की पहले से पहचान करना निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।डॉ. प्रतीक उमरे ने कहा कि नालियों पर किए गए ऐसे अतिक्रमण, निर्माण अथवा अवरोध जिनसे सार्वजनिक जलनिकासी प्रभावित हो रही है, उनकी निष्पक्ष जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही वर्षों पुरानी और क्षतिग्रस्त नालियों का सर्वे कराकर उनकी मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण की ठोस योजना बनाई जाए।उन्होंने कहा कि जलजमाव केवल असुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह सड़क, यातायात, स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। गंदा पानी लंबे समय तक जमा रहने से मच्छरों और संक्रमण का खतरा बढ़ता है तथा लोगों को आवागमन में परेशानी होती है।

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