शहर व क्षेत्र में कमरछठ (हलषष्ठी)का पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया।

शहर व क्षेत्र में कमरछठ (हलषष्ठी)का पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया।

शहर व क्षेत्र में कमरछठ (हलषष्ठी)का पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया।
तिल्दा नेवरा 
दिलीप वर्मा 
9424211900

शहर व क्षेत्र में कमरछठ (हलषष्ठी)का पर्व हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया।
हलषष्ठी (कमरछठ)  छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख पर्व है, जिसे माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए मनाती हैं, यह पर्व हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, भाद्र मास के कृष्ण पक्ष षष्ठी को भगवान श्री कृष्ण  के बड़े भाई बलराम का जन्म हुआ था यह व्रत बलराम जी के जन्म के उपलक्ष में मनाया जाता है।
 इस पर्व पर कई स्थानों पर मिट्टी के गड्ढे खोदकर तालाब जैसा प्रतीकात्मक स्थान बनाया जाता जिसे सगरी कहते हैं।
 सगरी का निर्माण कर विशेष पूजा अर्चना की जाती है सगरी के पास काशी के फूल पत्तियां आदि से उसे सजाया जाता है, इस दिन इस पूजा में भैंस के दूध, दही और घी के साथ लाई, महुआ ,तिल और अरहर सहित कुल छह प्रकार के अन्न का भोग लगाया जाता है।
 गाय के दूध इस पर्व पर वर्जित रहता है, भैंस के दूध का ही प्रयोग इस पर्व के लिए किया जाता है, महिलाएं पूरा दिन निर्जल उपवास रखती है और शाम को पसहर चावल से बने खिचड़ी का प्रसाद ग्रहण कर व्रत को पूर्ण करते हैं। पसहर चावल वह धान है जो बिना हल जोते प्राकृतिक रूप से उगता है जिसे पसहर चावल कहते हैं,और इसी परहर चावल से महिलाएं खिचड़ी का प्रसाद खाती हैं और अपना व्रत को तोड़ती है।

 पसहर चावल का भी विशेष महत्व इस पर्व पर है।
 इस पर्व को तिल्दा नेवरा शहर व क्षेत्र में हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया,  भारी बरसात में भी महिलाओं का उत्साह कम नहीं हुआ और यहां पर कई सार्वजनिक स्थानों में एवं कई घरों पर सगरी का निर्माण किया गया था जहां विशेष पूजाअर्चना की गई। कई स्थानों पर महाराज लोगों द्वारा इस पर्व के महत्व  के कथा का वर्णन भी किया जिसे महिलाओं ने ध्यानपूर्वक सुना।

Ads Atas Artikel

Ads Atas Artikel 1

Ads Center 2

Ads Center 3