*आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा की पहल पर मुस्लिम, सिख, मसीही, जैन एवं बौद्ध समाज के प्रतिनिधियों ने रखे सुझाव*

*आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा की पहल पर मुस्लिम, सिख, मसीही, जैन एवं बौद्ध समाज के प्रतिनिधियों ने रखे सुझाव*

*आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा की पहल पर मुस्लिम, सिख, मसीही, जैन एवं बौद्ध समाज के प्रतिनिधियों ने रखे सुझाव*
प्रेस विज्ञप्ति
*समान नागरिक संहिता-2026 को लेकर राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने किया व्यापक विचार-विमर्श*

*आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा की पहल पर मुस्लिम, सिख, मसीही, जैन एवं बौद्ध समाज के प्रतिनिधियों ने रखे सुझाव*

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत सिंह छाबड़ा की अध्यक्षता में खालसा स्कूल स्थित माता सुंदरी सभागार में समान नागरिक संहिता (UCC)-2026 को लेकर विभिन्न अल्पसंख्यक समाजों के प्रमुखों एवं प्रतिनिधियों के साथ व्यापक राय-मशविरा एवं विचार-विमर्श किया गया।
बैठक का उद्देश्य समान नागरिक संहिता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अल्पसंख्यक समाजों की राय, सुझाव एवं व्यावहारिक पक्ष को समझना तथा प्राप्त सुझावों को संकलित कर समान नागरिक संहिता समिति के समक्ष प्रस्तुत करना रहा।
विचार-विमर्श में मुख्य रूप से विवाह एवं विवाह पंजीयन, तलाक, भरण-पोषण (Maintenance), उत्तराधिकार एवं विरासत तथा लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर समाज प्रमुखों ने विस्तार से अपने विचार रखे।
लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर अधिकांश समाजों के प्रतिनिधियों ने अपनी असहमति व्यक्त की। प्रतिनिधियों का मत रहा कि इस विषय में किसी भी कानूनी प्रावधान पर विचार करते समय भारतीय पारिवारिक व्यवस्था, सामाजिक मूल्यों एवं विभिन्न समुदायों की मान्यताओं को ध्यान में रखना आवश्यक है।
विवाह पंजीयन को लेकर प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि विवाह के बाद पंजीयन को अनिवार्य किए जाने की दिशा में स्पष्ट एवं सरल व्यवस्था बनाई जाए। प्रत्येक जिले में विवाह पंजीयन के लिए सक्षम अधिकारी की व्यवस्था हो तथा आम नागरिकों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए पंजीयन प्रक्रिया को सरकारी स्तर पर सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया जाए।
तलाक एवं वैवाहिक विवादों के संबंध में समाज प्रमुखों ने कहा कि पति-पत्नी के बीच उत्पन्न विवादों को आपसी संवाद एवं सामाजिक स्तर पर समाधान के माध्यम से सुलझाने की संभावनाओं को भी महत्व दिया जाना चाहिए। विवाह विच्छेद की स्थिति में दोनों पक्षों के अधिकारों एवं हितों को ध्यान में रखते हुए न्यायसंगत और व्यवहारिक प्रावधान किए जाने चाहिए।
भरण-पोषण के विषय में भी प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव दिए। उनका कहना था कि अलगाव या तलाक की स्थिति में आर्थिक रूप से प्रभावित पक्ष के हितों की रक्षा के साथ-साथ व्यवस्था ऐसी हो जो न्यायसंगत, व्यवहारिक और दोनों पक्षों के अधिकारों के संतुलन पर आधारित हो।
उत्तराधिकार एवं विरासत के विषय पर समाज प्रमुखों ने कहा कि भारत में अलग-अलग धर्मों और समुदायों की अपनी सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराएं हैं। ऐसा कानून बने जो समानता और न्याय के उद्देश्य को मजबूत करने के साथ भारत की ‘विविधता में एकता’ वाली पहचान को भी सुरक्षित रखे।
बैठक में एक महत्वपूर्ण सुझाव यह भी आया कि समान नागरिक संहिता का प्रारूप तैयार होने के बाद एक बार पुनः सभी धर्मों एवं समाजों के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ चर्चा का अवसर दिया जाए, ताकि अंतिम प्रारूप तैयार करने से पहले समाजों की व्यावहारिक चिंताओं एवं सुझावों को भी समुचित रूप से शामिल किया जा सके।
राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि आयोग द्वारा इस विचार-विमर्श में प्राप्त सभी सुझावों को संकलित किया गया समाज की ओर से प्राप्त राय के आधार पर एक विस्तृत ड्राफ्ट/सुझाव पत्र तैयार कर समान नागरिक संहिता समिति को भेजा जाएगा, ताकि अल्पसंख्यक समाजों की बात भी संबंधित समिति के समक्ष प्रभावी रूप से रखी जा सके।
विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने रखे विचार
मुस्लिम समाज से मखमूर इकबाल खान, मौलाना इरशाद अली, रियाज अशरफी एवं मौलाना डॉ. जहीरूद्दीन ने अपने सुझाव रखे।
सिख समाज से राजवंत सिंह गरेवाल, जसप्रीत सिंह सलूजा, हरजीत सिंह हूरा, मनमोहन सिंह चावला एवं डॉ. सुरेंद्र सिंह खनूजा ने विचार रखे।
मसीही समाज से विकार जनरल फादर सेबेस्टियन पी., पास्टर्स फैलोशिप के अध्यक्ष पादरी राजेश गार्डिया, छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फैलोशिप के अध्यक्ष पादरी राकेश प्रकाश, पास्ट्रेट कोर्ट के अध्यक्ष जॉन राजेश पॉल, मारथोमा चर्च के मोहन सैमुएल, बिलीवर्स चर्च के रेवरेंड डीकन संदीप लाल, रेवरेंड सुरेशचंद्र पाइक एवं पास्टर विजय जोगी ने अपने विचार प्रस्तुत किए।
जैन समाज से विजय कुमार कंकरिया, भूपेंद्र कोटड़िया, अशोक पटवा, चंद्रेश शाह एवं लोकेश चंद्र जैन ने सुझाव दिए।
बौद्ध समाज से शैलेद्र बड़गे, भोजराज गौरखेड़े एवं सुनील वांद्रे ने अपने विचार रखे।
इस अवसर पर अनूप खेलकर, तनय लूनिया, राजेंद्र डडसेना, अरूण नगरार, जयेश बोथरा, जगदीश कुमार जैन, रतनजीत कौर, गगनदीप सिंह हंसपाल, नजमा अजीम सहित विभिन्न समाजों के प्रमुखजन एवं प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
राज्य अल्पसंख्यक आयोग द्वारा आयोजित यह विचार-विमर्श समान नागरिक संहिता को लेकर अल्पसंख्यक समाजों की राय और सुझावों को एक मंच पर लाने की महत्वपूर्ण पहल रही।

Ads Atas Artikel

Ads Atas Artikel 1

Ads Center 2

Ads Center 3