*जमीनी कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान के लिए आगे आए भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे; शिकायत के 24 घंटे के भीतर हिली राज्य की प्रशासनिक लॉबी*

*जमीनी कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान के लिए आगे आए भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे; शिकायत के 24 घंटे के भीतर हिली राज्य की प्रशासनिक लॉबी*

*जमीनी कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान के लिए आगे आए भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे; शिकायत के 24 घंटे के भीतर हिली राज्य की प्रशासनिक लॉबी*
*जमीनी कार्यकर्ताओं के मान-सम्मान के लिए आगे आए भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे; शिकायत के 24 घंटे के भीतर हिली राज्य की प्रशासनिक लॉबी*
छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में चल रही अफसरों की मनमानी और निरंकुशता के खिलाफ भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे की मुहिम रंग लाई है।डॉ. प्रतीक उमरे द्वारा सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए संवेदनशील शिकायत और ध्यानाकर्षण पत्र पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया था।इसके ठीक दूसरे दिन छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य प्रशासनिक सेवा के 125 अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला कर पूरी प्रशासनिक लॉबी में हड़कंप मचा दिया है।गौरतलब है कि दुर्ग नगर निगम के पूर्व एल्डरमैन भाजपा नेता डॉ. प्रतीक उमरे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ की वर्तमान प्रशासनिक स्थिति का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया था।उन्होंने अवगत कराया था कि कुछ निरंकुश अधिकारी सत्ता और संगठन के बीच समन्वय बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं और जमीनी कार्यकर्ताओं व आम जनता के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं,जिससे सरकार की छवि और कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित हो रहा था।इस संवेदनशील शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पीएमओ के अवर सचिव मुकुल दीक्षित ने मामले को तत्काल आगे बढ़ाया।पीएमओ द्वारा महज 24 घंटे के भीतर संज्ञान लिए जाने के बाद, केंद्र और राज्य सरकार की ओर से यह स्पष्ट और कड़ा संदेश गया कि आम जनता और जनसेवकों की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।इसके परिणामस्वरूप,शासन ने तत्काल प्रभाव से अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर स्तर के 125 अधिकारियों के प्रभार में बड़ा फेरबदल कर दिया।इस बड़े फेरबदल से यह साफ हो गया है कि डबल इंजन की सरकार में किसी भी स्तर पर प्रशासनिक उपेक्षा या तानाशाही के लिए कोई जगह नहीं है।

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